Tuesday, February 17, 2015

देश का राजनीतिक सुधार(Political Improvement of Country)

मित्रो आज की चर्चा का विशय है राजनीतिक सुधार मित्रो अब मैं आप लोगो को भारतीय राजनीति पर विचार दे रहा हू आप लोग पड़ लिजिये फ़िर इसमे कही कोई शंका हो या आपके सुझाव हो जरूर दे इसके बाद इस पर कार्य करने की विधि भी आगे बतायेंगे
1- देश में समस्याए बहुत है पर सभी समस्याओ
की मूल जड़ राजनीति है
राजनीती का पहला कदम
ही असंवैधानिक या अनैतिक तरीके से
रखा जाता है राजनीति का पहला कदम होता है चुनाव
लड़ना आज के समय में कोई भी नेता चुनाव लड़ने
के लिए किसी न
किसी पार्टी से टिकट लेता है टिकेट लेने
के लिए वो पार्टी के चंद टॉप लीडर
की चापलूसी या पार्टी में
चंदा चडाता है या अन्य रास्ते धन बल बाहुबल जातिवाद क्षेत्रवाद
या धर्मवाद आदि का सहारा लेता जबकि हमारे संविधान के अनुसार
किसी को चुनाव लड़ने के लिए
किसी पार्टी से होना या न होना कोई
जरूरी नही है परन्तु अफ़सोस
की बात ये है की हमारा चुनाव आयोग
ही प्रत्यासी को नही बल्कि पार्टी को प्रधानता देता है
चलिए मान लेते है की टिकट मिल
ही गया तो उसके आगे
की प्रक्रिया होती है चुनाव लड़ना आज
के समय में चुनाव लड़ने का मुख्य तरीका धन बल
और बाहुबल का आधार है नेता जातिवाद धर्मवाद आदि के
तरीके से चुनाव लड़ते है चुनाव लड़ने का जो असल
मुद्दा होना चाहिए क्षेत्र की समस्या और उस पर
कार्य करने का तरीका उस पर न
ही नेता लोग बात करना चाहते है और न
ही जनता का ध्यान जाने देते है मोटे तौर पर आज
किसी भी लोक सभा क्षेत्र का चुनाव
का खर्च 20 - 30 करोड़ के बीच आता है
असलियत में चुनाव में वोट फॉर काश वोट फॉर दारू वोट फॉर जाति,
वोट पर धर्म
आदि की ही प्रधानता होती है
पर असल बात तो ये है की जब कोई
भी नेता मुख्यतः मान लीजिये 25 करोड़
रुपये खर्च करेगा तो क्या वो क्षेत्र समाज या देश के विकास के
लिए प्रथम प्राथमिकता देगा या अपने पैसे निकालने में प्रथम
प्राथमिकता देगा जाहिर सी बात है पहले
वो अपना पैसा निकालेगा राजनीति में ज्यादातर नेता आज
के दिनों में चुनाव में अपना पैसा न लगाकर बड़े बड़े माफिया ,
उद्योगपति द्वारा लगाए गए पैसो से चुनाव लड़ते है तो अब आगे
तो उनकी मजबूरी ही है
की जीतने के बाद
इन्ही माफिया या उद्योगपति के
ही हिसाब से काम करेंगे ! मित्रो आज बस
इतना ही आगे
की कड़ी जानने के लिए जुड़े रहे हमारे
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राजनेतिक सुधार
वेर्तमन व्यवेस्था में क्या कमी है :- चुनाव आयोग
(election commission E C)
पार्टी को मान्यता देता है .
पार्टी जाती, धर्म, पैसे और ताकत के
आधार पर टिकट बाँटती है; जो चुनाव और ताकत
और पैसा पाने के लिए लड़ता है ना की जनता के
लिये . नतीजा भ्रष्ट प्रतिनिधि. लोक सभा के एक
चुनाव में प्रत्येक प्रत्याशी करोडो रूपये खर्च
करता है और जितने के बाद अपना पैसा वसूल करने
की कोशिश करता है.
समाधान:-
1. चुनाव आयोग(election commission E C)
पार्टीयो को नहीं सिर्फ
प्रत्याशी को मानता दे. हम पार्टी खत्म
करने को नही कह रहे. पर चुनाव आयोग
(election commission E C) पार्टियों को दिए गए
विशेषाधिकार समाप्त करे.
2. धन बल और बहु बल का असर खत्म करने के लिए
प्रतिनिघी का चुनाव के इलाके में घुमने
की मानही हो.
3. प्रचार के लिए प्रत्याशी रेडियो और
टीवी पर आपस में चर्चा करे और
बताये की वो चुनाव जितने के बाद क्या और केसे
करेगे.
4. चुनाव आयोग(election commission E C)
सभी प्रत्याशियों का बायो डाटा सभी घरो में
बटवाये.
5. चुनाव आयोग(election commission E C) के पास
अपना स्टाफ हो. IAS अधिकारियो और टीचर्स
का प्रयोग चुनावो में न हो.
6. NOTA batton पर 50% से ज्यादा मतदान
हो तो दुबारा चुनाव हो.
7. यदि वोटर लगातार 2 चुनावो में वोट
नहीं देता तो उसकी नागरिकता खत्म हो.

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