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Tuesday, August 4, 2015

The Worrier Buddhist Monk

आखिर कौन है ये बौद्ध भिक्षु जिसकी वजह से म्यांमार के मुसलमानों को जिधर से भागने का मौका मिल रहा है वो भाग रहा है .. जंगल के रास्ते या समुन्दर के रास्ते .. और म्यांमार मुसलमानों से खाली हो रहा है ...!!!
म्यांमार (बर्मा) में रोहिंग्या मुसलमान १९४७ के पहले से अपने ही देश के खिलाफ जिहादी संघर्ष शुरू किए हुए हैं। १९४६ में बर्मा को स्वतंत्रता दिए जाने के समय से ही उन्होंने बर्मा से अलग होकर पाकिस्तान (पूर्वी पाकिस्तान, जो अब बँगलादेश बन गया है) में शामिल होने का संघर्ष छेड़ दिया था। कश्मीरी मुसलमानों की तरह वे भी आजादी के नाम पर अब तक अपना मुक्ति संग्राम छेड़े हुए हैं और बर्मा की सरकार और जनता की नाक में दम रखा है। आखिर उनकी गद्दारी से तंग आकर वहाँ के शांतिप्रिय बौद्धों ने भी हथियार उठा लिया। और जिहादियों को उनके ही अंदाज में जवाब देना शुरू कर दिया । आज दुनिया के सारे जिहादी संगठन रोहिंग्या मुस्लिमों की मदद में आ खड़े हुए हैं, लेकिन वे म्यांमार के बौद्धों की एकजुटता के कारण इस मुस्लिम-भगाऊ अभियान को दबा नहीं पा रहे हैं।
रोहिंग्या मुसलमानों का इतिहास भी दुनियाँ भर के अन्य मुसलमानों की तरह ही है। अर्थात जैसे ही किसी देश में इनकी शक्ति और संख्या बढ़ती है अपने स्वभाव के अनुसार वे इस्लामी राष्ट्र के निर्माण के लिए जेहाद छेड़ देते हैं।
अपने ही देश के खिलाफ उनकी जेहाद गाथा द्वितीय विश्वयुद्ध के काल से शुरू होती है जब २८ मार्च १९४२ के रोहिंग्या मुसलमानों ने म्यांमार के मुस्लिम-बहुल उत्तरी अराकान क्षेत्र में करीब २०,००० बौद्धों को मार डाला था।
वास्तव में अंग्रेजों ने जापानी फौजों के मुकाबले से पीछे हटते हुए बीच में स्वभाव से ही झगड़ालू रोहिंग्या मुसलमानों को खड़ा करने की कोशिश की थी। उन्होंने इन मुसलमानों को ढेरों हथियार उपलब्ध कराया तथा यह आश्वासन दिया कि इस युद्ध में यदि उन्होंने मित्र राष्ट्रों का समर्थन किया तो उन्हें उनका वांछित ‘इस्लामी राष्ट्र' दे दिया जाएगा। हथियार पाकर इन रोहिंग्या मुसलमानों ने उनका प्रयोग जापानियों के खिलाफ करने के बजाए, अराकानों (जिनमें ज्यादातर बौद्ध थे) को कत्ल करने में किया। उन्होंने अंग्रेजों की कृपा से अपना राज्य पाने के बजाए स्वयं ही बौद्धों का सफाया करके अपना मुस्लिम राष्ट्र हासिल करने की राह पर चल पड़े ।
मई १९४६ में बर्मा की स्वतंत्रता से पहले कुछ अराकानी
मुस्लिम नेताओं ने भारत के मोहम्मद अली जिन्ना से संपर्क किया और मायू क्षेत्र को पूर्वी पाकिस्तान में शामिल कराने के लिए उनकी सहायता माँगी। इसके पूर्व अराकान में जमीयतुल उलेमा ए इस्लाम नामक एक संगठन की स्थापना हुई जिसके अध्यक्ष उमरा मियाँ थे। इसका उद्देश्य भी अराकान के सीमांत जिले मायू को पूर्वी पाकिस्तान में मिलाना था लेकिन बर्मा सरकार ने मायू को स्वतंत्र इस्लामी राज्य बनाने या उसे पाकिस्तान में शामिल करने से इनकार कर दिया।
इस पर उत्तरी अराकान के मुजाहिदों ने बर्मा सरकार के खिलाफ जिहाद की घोषणा कर दी। मायू क्षेत्र के दोनों मुस्लिम-बहुल शहरों ब्रथीडौंग एवं मौंगडाऊ में अब्दुल कासिम के नेतृत्व में लूट, हत्या, बलात्कार एवं आगजनी का भयावह खेल शुरू हो गया और कुछ ही दिनों में इन दोनों शहरों से बौद्धों को या तो मार डाला गया अथवा भगा दिया गया। यह कुछ वैसा ही कार्य रहा जैसे कश्मीर घाटी के जिहादियों ने पूरे घाटी क्षेत्र को कश्मीरी पंडितों से खाली करा लिया था।
अपनी जीत से उत्साहित होकर सन १९४७ तक पूरे देश के प्राय: सभी मुसलमान एकजुट हो गये एवं मुजाहिदीन मूवमेंट के नाम से बर्मा पर मानों हमला ही बोल दिया गया।
स्थिती यहाँ तक पहुँच गयी कि १९४९ में तो बर्मा सरकार का नियंत्रण केवल अकयाब शहर तक सीमित रह गया, बाकी पूरे अराकान पर जेहादी मुसलमानों का कब्जा हो गया। यहाँ लाकर हजारों बंगाली मुस्लिम बसाए गए। इस अवैध घुसपैठ से यहाँ मुस्लिम आबादी काफी बढ़ गई। मुजाहिदीन यहीं नहीं रूके। अराकान से सटे अन्य प्रांतों में भी यही नीति अपनायी जाने लगी और ये पूरा क्षेत्र म्यांमार के लिए कैंसर बन गया।
यहाँ से हो रही लगातार देशविरोधी गतिविधियों ने पूरे देश को परेशान कर रखा था।
आखिरकार बर्मा सरकार ने इस इलाके में सीधी सैनिक कार्रवाई शुरू कर दी। विश्व के लगभग सभी मुस्लिम राष्ट्रों ने बर्मा सरकार के इस अभियान की निंदा की। परन्तु सरकार पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा और सेना ने पूरे क्षेत्र में जबरदस्त रूप से जिहादियों की धर-पकड़ शुरू की एवं अनाधिकारिक रूप से सैकड़ों एनकाउन्टर किये। जिसके बाद अधिकतर जेहादी जान बचाकर पूर्वी पाकिस्तान भाग गये, कुछ भूमिगत हो गये एवं कुछ शांत होकर पूर्वी पाकिस्तान से लगी सीमा पर चावल आदि की तस्करी धंधों में लग गए। परन्तु अन्दर ही अन्दर विश्व के कट्टरपंथी इस्लामी गुटों के सम्पर्क में रहे। अपनी शक्ति बढ़ाते रहे और जेहाद के लिए सही मौके का इंतजार करते रहे।
और ये मौका उन्हें फिर से मिला १९७१ में पूर्वी पाकिस्तान के बँगलादेश के रूप में उदय के बाद।
बचे खुचे जिहादियों में फिर नई सुगबुगाहट पैदा हुई और १९७२ में जिहादी नेता जफ्फार ने रोहिंग्या लिबरेशन पार्टी (आर.एल.पी.) बनाई और बिखरे जिहादियों को
इकट्ठा करना शुरू किया। हथियार बँगलादेश से मिल गए। और जेहाद फिर शुरू हो गया। परन्तु १९७४ में फिर से बर्मी सेना की कार्रवाई के आगे पार्टी बिखर गई और इसके नेता जफ्फार बँगलादेश भाग गए।
इसकी विफलता पर भी सेक्रेटरी मोहम्मद जफर हबीब ने हार नहीं मानी और १९७४ में ही उन्होंने ७० मुस्लिम छापामार जेहादियों के साथ रोहिंग्या पैट्रियाटिक फ्रंट का गठन किया।
इसी फ्रंट के सी.ई.ओ. रहे मोहम्मद यूनुस ने रोहिंग्या
सोलिडेरिटी आर्गनाइजेशन (आर.एस.ओ.)बनाया और उपाध्यक्ष रहे नूरुल इस्लाम ने अराकान रोहिंग्या इस्लामिक फ्रंट (ए.आर.आई.एफ) का गठन किया। इन जेहादी संगठनों की मदद के लिए पूरा इस्लामी जगत सामने आ गया। इनमें बँगलादेश एवं पाकिस्तान के सभी इस्लामी संगठन, अफगानिस्तान का हिजबे इस्लामी, भारत के जम्मू कश्मीर में सक्रिय हिजबुल मुजाहिदीन, इंडियन मुजाहिदीन, मलेशिया के अंकातन बेलिया इस्लाम सा मलेशिया ( ए.बी.आई.एम) तथा इस्लामिक यूथ आर्गनाइजेशन आफ मलेशिया मुख्य रूप से शामिल थे।
पाकिस्तानी सैनिक गुप्तचर संगठन आई.एस.आई. ने रोहिंग्या मुसलमानों को पाकिस्तान ले जाकर उन्हें अपने ट्रेनिंग कैंपों में उच्च स्तरीय सैनिक तथा गुरिल्ला युद्धशैली का प्रशिक्षण प्रदान किया। इसके बाद ये लड़ाई और भी हिंसक हो गयी। पूरे देश में बौद्धों पर हमले होने लगे।
यहाँ तक भी बर्मा की आम जनता अपनी सुरक्षा के प्रति उदासीन रही। क्योंकि हमारे भारत की तरह वहाँ भी शान्ति और झूठी एकता का पाठ पढ़ाने वाले नेताओं और बाबाओं का मकड़जाल फैला हुआ था।
परन्तु जेहाद का प्रभाव जब उनकी अपनी जिन्दगी पर पड़ने लगा तो उनकी नींद धीरे-धीरे खुलने लगी।
ऐसे में सामने आये मांडले के बौद्ध भिक्षु अशीन विराथु जिन्होनें अपने प्रभावशाली भाषणों से जनता को ये एहसास कराया कि यदि अब भी वो नहीं जागे तो उनका अस्तित्व ही मिट जाएगा। इसी दौरान कुछ हिंसक झड़पें हुईं कई बौद्ध मारे गये। आखिर जनता का धैर्य टूट गया और लोग भड़क उठे। यहाँ तक कि दुनियाँ में सबसे शान्तिप्रिय माने जाने वाले बौद्ध भिक्षुओं ने भी हथियार उठा लिया। फिर तो बर्मा की तस्वीर ही बदलने लगी।
1968 में जन्मे अशीन विराथु ने 14 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया और भिक्षु का जीवन अपना लिया था। विराथु को लोगों ने तभी जाना जब वे 2001 में कट्टर राष्ट्रवादी और मुस्लिम विरोधी गुट '969' के साथ जुड़े।
तब बर्मा की सरकार ने हिंसक झड़पों एवं उनके भड़काऊ भाषणों पर सेकुलरिज्म दिखाते हुए विराथु को २५ साल की सजा सुनायी थी.. पर उनके जेल जाने के बाद भी देश जलता रहा और जबरदस्त जनदबाव में सरकार को उन्हें उनकी सजा घटाकर केवल सात साल बाद २०११ में ही जेल से रिहा करना पड़ा। रिहा होने के पश्चात भी विराथु की कट्टर राष्ट्रवादी सोच में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। और वे अनवरत रूप से अपने अभियान में लगे रहे।
२८ मई २०१२ को मुसलमानों नें एक बौद्ध महिला का बलात्कार करके हत्या कर दी जिसके बाद पूरे म्यांमार के बौद्ध अत्यंत उग्र हो गये और फिर तो वहाँ ऐसी आग लगी कि पूरा देश जल उठा। जिसकी आँच भारत तक भी पहुँची और नतीजा मुंबई के आजाद मैदान में देखा गया।
म्यांमार के दंगों में विराथु के भड़काऊ भाषणों ने आग में घी का काम किया। उन्होंनें साफ कहा कि अब यदि हमें अपना अस्तित्व बचाना है तो अब शांत रहने का समय नहीं रहा।
इन्होनें बुद्ध के उपदेशों के रास्ते को छोड़कर हिटलर की नीति को अपनाया। इन्होने म्यांमार की जनता को साफ कहा कि अगर हमने इनको छोड़ा तो देश से बौद्धों का सफाया हो जाएगा और बर्मा मुस्लिम देश हो जायेगा..।
विराथु का कहना है कि मुस्लिम अल्पसंख्यक बौद्ध लड़कियों को फंसाकर शादियाँ कर रहे हैं एवं बड़ी संख्या में बच्चे पैदा करके पूरे देश के जनसंख्या-संतुलन को बिगाड़ने के मिशन में दिन रात लगे हुए हैं, जिससे बर्मा की आन्तरिक सुरक्षा को भारी खतरा उत्पन्न हो गया है। इनका कहना है कि मुसलमान एक दिन पूरे देश में फैल जाएंगे और बर्मा में बौद्धों का नरसंहार शुरू हो जाएगा।
संयुक्तराष्ट्र की विशेष प्रतिनिधि यांग ली ने सेकुलरिज्म दिखाते हुए बर्मा का दौरा किया और विराथु की साम्प्रदायिक सोच की निंदा की तब विराथु की हिम्मत देखिये ... उसने उसे खुलेआम धमकी दी एवं यहाँ तक कि उन्हें वेश्या और कुतिया भी कह दिया और कहा-'' आपकी संयुक्त राष्ट्र में प्रतिष्ठा है, इसलिए आप अपने आप को बहुत प्रतिष्ठित व्यक्ति न समझ लें। बर्मा के लोग अपने देश की रक्षा स्वयं करेंगे। उन्हें आपके सलाह की जरूरत नहीं है।'' मीडिया के सामने कहे गये अपने निर्भीक विचारों के कारण उनकी ख्याति पूरी दुनियाँ में फैल गयी।
बाद में विराथु के विचारों का जनसाधारण में प्रचंड समर्थन देखकर वहाँ की सरकार भी झुकी और वहाँ की राष्ट्रपति थेन सेन ने सार्वजनिक रूप से कहा- उनको अब अपना रास्ता देख लेना चाहिए . . हमारे लिए महत्वपूर्ण हमारे देश के मूलनिवासी हैं, मुस्लिम चाहें तो शिविरों में ही रहे ... या बांग्लादेश जाए।
विराथु ने अपने देश से लाखों मुसलमानों को भागने पर मजबूर कर दिया। वे ज्यादातर अपनी बातें डीवीडी और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाते हैं।
विराथू के प्रवचनों को अगर कोई सुने तो उसे लग सकता है कि शांत स्वरों में मोक्षप्राप्ति की बात चल रही है। दृष्टि नीचे किए हुए जब वह अपना प्रवचन दे रहे होते हैं, तो प्रस्तर प्रतिमा की तरह स्थिर नजर आते हैं, चेहरे पर भी कोई उत्तेजना नजर नहीं आती। जो कोई बर्मी भाषा न समझता हो, उसे लगेगा कि वह कोई गंभीर आध्यात्मिक उपदेश दे रहे हैं, लेकिन वह अपने हर उपदेश में बौद्धों के संगठित होने और हिंसा का जवाब हिंसा से देने का उपदेश देते हैं।
मंडाले के अपने मासोयिन मठ से लगभग दो हजार पांच सौ भिक्षुओं की अगुआई करने वाले विराथु के फेसबुक पर हजारों फालोअर्स हैं और यूट्यूब पर वीडियो को लाखों बार देखा जा चुका है।
इधर छह करोड़ की बौद्ध आबादी वाले म्यांमार में मुसलिम विरोधी भावना तेजी से गति पकड़ रही है।
बौद्ध भिक्षुओं को शांति और समभाव का आचरण करने के लिए जाना जाता है किंतु म्यांमार के अधिकांश बौद्ध आत्मरक्षा के लिए अब जिहादियों का तौर-तरीका अपनाने में भी कोई संकोच नहीं कर रहे हैं।
म्यांमार में हुए कई सर्वे के बाद ये प्रमाणित हो चुका है कि जनता एवं बौद्ध भिक्षु विराथु के पूरी तरह साथ हैं। विराथु का स्वयं भी कहना है कि वह न तो घृणा फैलाने में विश्वास रखते हैं और न हिंसा के समर्थक हैं, लेकिन हम कब तक मौन रहकर सारी हिंसा और अत्याचार को झेलते रह सकते हैं? इसलिए वह अब पूरे देश में घूम घूम कर भिक्षुओं तथा सामान्यजनों को उपदेश दे रहे हैं कि यदि हम आज कमजोर पड़े, तो अपने ही देश में हम शरणार्थी हो जाएँगे।
वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के लगभग सभी इस्लामी संगठनों नें म्यांमार की हिंसा के लिए सीधे-सीधे भारत को जिम्मेदार ठहराया।
कराची में हुई एक सभा में लश्कर-ए-तैयबा तथा जमात-उद-दवा के संस्थापक हाफिज सईद ने कहा कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के सफाए में भारत की सरकार वहाँ की सरकार की मदद कर रही है। सईद ने वहाँ के मुसलमानों की मदद के लिए पूरे मुस्लिम जगत का आह्वान किया और म्यांमार के मुसलमानों को हथियार उठाने और अपनी अलग तंजीम बनाने की सलाह दी तथा आश्वासन दिया कि पाकिस्तान के सभी इस्लामी संगठन म्यांमार के मुस्लिमों की पूरी मदद करेंगे।
उत्तर-पश्चिमी अखंड भारत में मुस्लिम आक्रमणकारियों नें सैकड़ों साल पहले ही समूची बौद्ध आबादी को समाप्त कर दिया था। आज भी पाकिस्तान में न कोई बौद्ध आबादी है न बौद्ध मंदिर इसलिए वहाँ कोई बदले की कार्रवाई नहीं हो सकी इसीलिए जिहादियों ने गुस्से में भारत के सर्वाधिक पवित्र बौद्ध स्थल बोधगया को लहूलुहान करने की साजिश रची थी। इसके साथ
ही बँगलादेश के जिहादी संगठन भी बौद्धों को निशाना बनाने में रोहिंग्या गुटों की मदद कर रहे हैं। और ये आज भी जारी है।
म्यांमार के बौद्धों के इस नये तेवर से पूरी दुनिया में खलबली मच गई है। दुनिया भर के अखबारों में उनकी निंदा में लेख छापे जा रहे हैं परन्तु अशीन विराथु को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
यही नहीं..विराथु के भाषणों से प्रभावित होकर पड़ोसी मुल्क श्रीलंका में भी बौद्ध भिक्षुओं नें मुख्यत: मुसलमानों के खिलाफ ‘बोडु बाला सेना’ नाम का संगठन बना लिया है। इस संगठन का मुख्यालय कोलंबो के बुद्धिस्ट कल्चरल सेंटर में है, जिसका उद्घाटन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे किया था। इस संगठन के भी लाखों समर्थक हैं, जो मानते हैं कि श्रीलंका को मुसलमानों से खतरा है। हजारों लोग उनकी रैलियों में शामिल होते हैं तो सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी-खासी पकड़ बनी है। वे अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक विश्वासों, पूजा-पाठ के तरीकों और विशेषकर मस्जिदों को निशाना बना रहे हैं।
केवल म्यांमार और श्रीलंका ही नहीं..चीन में भी बौद्धों और मुस्लिमों में टकराव जारी है। बौद्ध देश चीन के मुस्लिम बहुल प्रांत शिनजियांग के मुसलमान देश के इस क्षेत्र को इस्लामी राष्ट्र बनाने के लिए वर्षों से जेहाद कर रहे हैं। ये लोग चीन में केवल एक बच्चा पैदा करने के कानून का भी हिंसक विरोध करते रहे हैं। यहाँ तुर्क मूल के उईंगर मुसलमान पाकिस्तान के कबायली इलाकों में आतंक की ट्रेनिंग लेकर चीनी नागरिकों का खून बहाने की साजिश रचते हैं।
परन्तु पूरी दुनियाँ को इस्लामी आग में जलता देखकर चीनी सरकार ने सबक लिया है और यहाँ के मुसलमानों पर जबरदस्त दमन की नीति अपना ली है। यहाँ मुसलमानों को दाढ़ी रखने, बुर्का पहनने यहाँ तक की रोजा रखने पर भी पाबंदी लगा दी गयी है।
इसके बावजूद चीन में आतंकवादी गतिविधियां एवं जेहादी भावना भी लगातार बढ़ रही हैं जिसके कारण यहाँ भी बौद्धों और मुसलमानों में घमासान मचा हुआ है।
म्यांमार में हुई हिंसक घटनाओं के बाद से अब प्राय: पूरी दुनिया में बौद्धों और मुस्लिमों में भारी तनातनी पैदा हो गई है। जिनमें अशीन विराथु बौद्ध दुनियाँ के एक नायक एवं जेहादी दुनियाँ के लिए एक बड़े खलनायक बन कर उभरे हैं

DigiLocker – How to Sign Up for Digital/Digi Locker with your Aadhar Card

Digital Locker

अब आपको अपने important documents  साथ लेकर घूमने की जरूरत नही है।
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DIGITAL LOCKER , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम का अहम हिस्सा है।

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लॉगिन होने के बाद आपसे जो इन्फॉर्मेंशन मांगी जाए उसे भरें। इसके बाद आपका अकाउंट बन जाएगा। अकाउंट खुलने के बाद आप कभी भी इस पर अपने पर्सनल डॉक्युमेंट्स अपलोड कर सकेंगे।


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Digital Locker is a online repository, a cloud service from Department of Electronics & Information Technology (DietY) Ministry of Communications & IT, Government of India. The service allow any one in India with valid Aadhaar card, or unique identification (UID) number to store their government issued documents such as PAN (Permanent Account Number), Voter Identity, Degree Certificates and many others.

How to Respect Parents

माता पिता का सम्मान करने के 35 तरीके!!
1. उनकी उपस्थिति में अपने फोन को दूर रखो
2. वे क्या कह रहे हैं इस पर ध्यान दो
3. उनकी राय स्वीकारें
4. उनकी बातचीत में सम्मिलित हों
5. उन्हें सम्मान के साथ देखें
6. हमेशा उनकी प्रशंसा करें
7. उनको अच्छा समाचार जरूर बताएँ
8. उनके साथ बुरा समाचार साझा करने से बचें
9. उनके दोस्तों और प्रियजनों से अच्छी तरह से बोलें
10. उनके द्वारा किये गए अच्छे काम सदैव याद रखें
11. वे यदि एक ही कहानी दोहरायें तो भी ऐसे सुनें जैसे पहली बार सुन रहे हो
12. अतीत की दर्दनाक यादों को मत दोहरायें
13. उनकी उपस्थिति में कानाफ़ूसी न करें
14. उनके साथ तमीज़ से बैठें
15. उनके विचारों को न तो घटिया बताये न ही उनकी आलोचना करें
16. उनकी बात काटने से बचें
17. उनकी उम्र का सम्मान करें
18. उनके आसपास उनके पोते/पोतियों को अनुशासित करने अथवा मारने से बचें
19. उनकी सलाह और निर्देश स्वीकारें
20. उनका नेतृत्व स्वीकार करें
21. उनके साथ ऊँची आवाज़ में बात न करें
22. उनके आगे अथवा सामने से न चलें
23. उनसे पहले खाने से बचें
24. उन्हें घूरें नहीं
25. उन्हें तब भी गौरवान्वित प्रतीत करायें जब कि वे अपने को इसके लायक न समझें
26. उनके सामने अपने पैर करके या उनकी ओर अपनी पीठ कर के बैठने से बचें
27. न तो उनकी बुराई करें और न ही किसी अन्य द्वारा की गई उनकी बुराई का वर्णन करें
28. उन्हें अपनी प्रार्थनाओं में शामिल करें
29. उनकी उपस्थिति में ऊबने या अपनी थकान का प्रदर्शन न करें
30. उनकी गलतियों अथवा अनभिज्ञता पर हँसने से बचें
31. कहने से पहले उनके काम करें
32. नियमित रूप से उनके पास जायें
33. उनके साथ वार्तालाप में अपने शब्दों को ध्यान से चुनें
34. उन्हें उसी सम्बोधन से सम्मानित करें जो वे पसन्द करते हैं
35. अपने किसी भी विषय की अपेक्षा उन्हें प्राथमिकता दें
माता – पिता इस दुनिया में सबसे बड़ा अनमोल खज़ाना हैं..!!
इसकी कद्र करें चाहे.

Facts About Maharana Pratap

नाम - कुँवर प्रताप जी (श्री महाराणा प्रताप सिंह जी)
जन्म - 9 मई, 1540 ई.
जन्म भूमि - कुम्भलगढ़, राजस्थान
पुण्य तिथि - 29 जनवरी, 1597 ई.
पिता - श्री महाराणा उदयसिंह जी
माता - राणी जीवत कँवर जी
राज्य - मेवाड़
शासन काल - 1568–1597ई.
शासन अवधि - 29 वर्ष
वंश - सुर्यवंश
राजवंश - सिसोदिया
राजघराना - राजपूताना
धार्मिक मान्यता - हिंदू धर्म
युद्ध - हल्दीघाटी का युद्ध
राजधानी - उदयपुर
पूर्वाधिकारी - महाराणा उदयसिंह
उत्तराधिकारी - राणा अमर सिंह

अन्य जानकारी -
महाराणा प्रताप सिंह जी के पास एक सबसे प्रिय घोड़ा था,
जिसका नाम 'चेतक' था।

राजपूत शिरोमणि महाराणा प्रतापसिंह उदयपुर,
मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे।

वह तिथि धन्य है, जब मेवाड़ की शौर्य-भूमि पर मेवाड़-मुकुटमणि
राणा प्रताप का जन्म हुआ।

महाराणा का नाम
इतिहास में वीरता और दृढ़ प्रण के लिये अमर है।

महाराणा प्रताप की जयंती विक्रमी सम्वत् कॅलण्डर
के अनुसार प्रतिवर्ष ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती
है।

महाराणा प्रताप के बारे में कुछ रोचक जानकारी:-

1... महाराणा प्रताप एक ही झटके में घोड़े समेत दुश्मन सैनिक को काट डालते थे।

2.... जब इब्राहिम लिंकन भारत दौरे पर आ रहे थे तब उन्होने
अपनी माँ से पूछा कि हिंदुस्तान से आपके लिए क्या लेकर
आए| तब माँ का जवाब मिला- ”उस महान देश की वीर भूमि
हल्दी घाटी से एक मुट्ठी धूल लेकर आना जहाँ का राजा अपनी प्रजा के प्रति इतना वफ़ादार था कि उसने आधे हिंदुस्तान के बदले अपनी मातृभूमि को चुना ” लेकिन बदकिस्मती से उनका वो दौरा रद्द हो गया था | “बुक ऑफ़
प्रेसिडेंट यु एस ए ‘किताब में आप यह बात पढ़ सकते हैं |

3.... महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलोग्राम था और कवच का वजन भी 80 किलोग्राम ही था|

कवच, भाला, ढाल, और हाथ में तलवार का वजन मिलाएं तो कुल वजन 207 किलो था।

4.... आज भी महाराणा प्रताप की तलवार कवच आदि सामान
उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में सुरक्षित हैं |

5.... अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है तो आधा हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे पर बादशाहत अकबर की ही रहेगी|
लेकिन महाराणा प्रताप ने किसी की भी अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया |

6.... हल्दी घाटी की लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे और
अकबर की ओर से 85000 सैनिक युद्ध में सम्मिलित हुए |

7.... महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का मंदिर भी बना हुआ है जो आज भी हल्दी घाटी में सुरक्षित है |

8.... महाराणा प्रताप ने जब महलों का त्याग किया तब उनके साथ लुहार जाति के हजारो लोगों ने भी घर छोड़ा और दिन रात राणा कि फौज के लिए तलवारें बनाईं| इसी
समाज को आज गुजरात मध्यप्रदेश और राजस्थान में गाढ़िया लोहार कहा जाता है|
मैं नमन करता हूँ ऐसे लोगो को |

9.... हल्दी घाटी के युद्ध के 300 साल बाद भी वहाँ जमीनों में तलवारें पाई गई।
आखिरी बार तलवारों का जखीरा 1985 में हल्दी घाटी में मिला था |

10..... महाराणा प्रताप को शस्त्रास्त्र की शिक्षा "श्री जैमल मेड़तिया जी" ने दी थी जो 8000 राजपूत वीरों को लेकर 60000 मुसलमानों से लड़े थे। उस युद्ध में 48000 मारे गए थे
जिनमे 8000 राजपूत और 40000 मुग़ल थे |

11.... महाराणा के देहांत पर अकबर भी रो पड़ा था |

12.... मेवाड़ के आदिवासी भील समाज ने हल्दी घाटी में
अकबर की फौज को अपने तीरो से रौंद डाला था वो महाराणा प्रताप को अपना बेटा मानते थे और राणा बिना भेदभाव के उन के साथ रहते थे|
आज भी मेवाड़ के राजचिन्ह पर एक तरफ राजपूत हैं तो दूसरी तरफ भील |

13..... महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक महाराणा को 26 फीट का दरिया पार करने के बाद वीर गति को प्राप्त हुआ | उसकी एक टांग टूटने के बाद भी वह दरिया पार कर गया। जहाँ वो घायल हुआ वहां आज खोड़ी इमली नाम का पेड़ है जहाँ पर चेतक की मृत्यु हुई वहाँ चेतक मंदिर है |

14..... राणा का घोड़ा चेतक भी बहुत ताकतवर था उसके
मुँह के आगे दुश्मन के हाथियों को भ्रमित करने के लिए हाथी
की सूंड लगाई जाती थी । यह हेतक और चेतक नाम के दो घोड़े थे|

15..... मरने से पहले महाराणा प्रताप ने अपना खोया
हुआ 85 % मेवाड फिर से जीत लिया था । सोने चांदी और
महलो को छोड़कर वो 20 साल मेवाड़ के जंगलो में घूमे |

16.... महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो और लम्बाई 7’5” थी, दो म्यान वाली तलवार और 80 किलो का भाला रखते थे हाथ में।

महाराणा प्रताप के हाथी
की कहानी:

मित्रो आप सब ने महाराणा
प्रताप के घोड़े चेतक के बारे
में तो सुना ही होगा,
लेकिन उनका एक हाथी
भी था। जिसका नाम था रामप्रसाद। उसके बारे में आपको कुछ बाते बताता हुँ।

रामप्रसाद हाथी का उल्लेख
अल- बदायुनी, जो मुगलों
की ओर से हल्दीघाटी के
युद्ध में लड़ा था ने अपने एक ग्रन्थ में किया है।

वो लिखता है की जब महाराणा
प्रताप पर अकबर ने चढाई की
थी तब उसने दो चीजो को
ही बंदी बनाने की मांग की
थी एक तो खुद महाराणा
और दूसरा उनका हाथी
रामप्रसाद।

आगे अल बदायुनी लिखता है
की वो हाथी इतना समझदार
व ताकतवर था की उसने
हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही
अकबर के 13 हाथियों को मार
गिराया था

वो आगे लिखता है कि
उस हाथी को पकड़ने के लिए
हमने 7 बड़े हाथियों का एक
चक्रव्यूह बनाया और उन पर
14 महावतो को बिठाया तब
कहीं जाकर उसे बंदी बना पाये।

अब सुनिए एक भारतीय
जानवर की स्वामी भक्ति।

उस हाथी को अकबर के समक्ष
पेश किया गया जहा अकबर ने
उसका नाम पीरप्रसाद रखा।
रामप्रसाद को मुगलों ने गन्ने
और पानी दिया।
पर उस स्वामिभक्त हाथी ने
18 दिन तक मुगलों का न
तो दाना खाया और न ही
पानी पिया और वो शहीद
हो गया।

तब अकबर ने कहा था कि
जिसके हाथी को मैं अपने सामने
नहीं झुका पाया उस महाराणा
प्रताप को क्या झुका पाउँगा।
ऐसे ऐसे देशभक्त चेतक व रामप्रसाद जैसे तो यहाँ
जानवर थे।

Murder of an Unborn girl child

गर्भपात करवाना गलत माना गया है, कृपया इस लेख को अवश्य पढ़े
 और
 अगर इसे पढ़ कर आपके दिल की धड़कने बढ़ जाये
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 अवश्य करे |
 अमेरिका में सन 1984 में एक सम्मेलन हुआ था - 'नेशनल राइट्स
 टू लाईफ
 कन्वैन्शन'। इस सम्मेलन के एक प्रतिनिधि ने डॉ॰ बर्नार्ड
 नेथेनसन के
 द्वारा गर्भपात
 की बनायी गयी एक
 अल्ट्रासाउण्ड फिल्म 'साइलेण्ट
 स्क्रीम' (गूँगी चीख)
 का जो विवरण
 दिया था, वह इस प्रकार है- 'गर्भ की वह मासूम
 बच्ची अभी 15 सप्ताह
 की थी व काफी चुस्त
 थी।
 हम उसे अपनी माँ की कोख मेँ खेलते,
 करवट बदलते
 व अंगूठा चूसते हुए देख रहे थे। उसके दिल
 की धड़कनों को भी हम देख पा रहे थे और
 वह उस
 समय 120 की साधारण गति से धड़क रहा था। सब कुछ
 बिलकुल
 सामान्य था; किन्तु जैसे ही पहले औजार (सक्सन
 पम्प) ने
 गर्भाशय की दीवार को छुआ, वह मासूम
 बच्ची डर से एकदम घूमकर सिकुड़
 गयी और उसके
 दिल की धड़कन काफी बढ़
 गयी।
 हालांकि अभी तक किसी औजार ने
 बच्ची को छुआ तक
 भी नहीं था, लेकिन
 उसे अनुभव हो गया था कि कोई चीज उसके आरामगाह,
 उसके
 सुरक्षित क्षेत्र पर हमला करने का प्रयत्न कर
 रही है। हम
 दहशत से भरे यह देख रहे थे कि किस तरह वह औजार उस
 नन्हीं-मुन्नी मासूम गुड़िया-
 सी बच्ची के टुकड़े-टुकड़े कर रहा था।
 पहले कमर,
 फिर पैर आदि के टुकड़े ऐसे काटे जा रहे थे जैसे वह
 जीवित
 प्राणी न होकर कोई गाजर-मूली हो और वह
 बच्ची दर्द से छटपटाती हुई, सिकुड़कर
 घूम-घूमकर
 तड़पती हुई इस हत्यारे औजार से बचने का प्रयत्न
 कर
 रही थी। वह इस बुरी तरह
 डर
 गयी थी कि एक समय उसके दिल
 की धड़कन 200 तक पहुँच गयी! मैँने
 स्वंय
 अपनी आँखों से उसको अपना सिर पीछे
 झटकते व
 मुँह खोलकर चीखने का प्रयत्न करते हुए देखा, जिसे
 डॉ॰
 नेथेनसन ने उचित
 ही 'गूँगी चीख'
 या 'मूक पुकार' कहा है। अंत मेँ हमने वह नृशंस
 वीभत्स दृश्य
 भी देखा, जब
 सँडसी उसकी खोपड़ी को तोड़ने
 के लिए
 तलाश रही थी और फिर दबाकर उस कठोर
 खोपड़ी को तोड़
 रही थी क्योँकि सिर
 का वह भाग बगैर तोड़े सक्शन ट्यूब के माध्यम से बाहर
 नहीं निकाला जा सकता था।' हत्या के इस
 वीभत्स
 खेल को सम्पन्न करने में करीब पन्द्रह मिनट
 का समय
 लगा और इसके दर्दनाक दृश्य का अनुमान इससे अधिक और कैसे
 लगाया जा सकता है कि जिस डॉक्टर ने यह गर्भपात किया था और
 जिसने मात्र
 कौतूहलवश इसकी फिल्म
 बनवा ली थी,
 उसने जब स्वयं इस फिल्म को देखा तो वह
 अपना क्लीनिक
 छोड़कर चला गया और फिर वापस नहीं आया ! —
 आपका एक शेयर
 किसी अजन्मी बच्ची -
 लडकी की जान बचा सकता है!

 "Save Girl

Side Effects of Tea

चाय के दुष्प्रभाव 🌞
चाय पिने वाले इसे जरूर पढ़े !!!!!!!!!!!!!!
सिर्फ दो सौ वर्ष पहले तक भारतीय घर में चाय
नहीं होती थी। आज कोई
भी घर आये अतिथि को पहले चाय पूछता है। ये बदलाव
अंग्रेजों की देन है। कई लोग ऑफिस में दिन भर चाय लेते रहते
है., यहाँ तक की उपवास में भी चाय लेते है ।
किसी भी डॉक्टर के पास जायेंगे तो वो शराब - सिगरेट
- तम्बाखू छोड़ने को कहेगा , पर चाय नहीं,
क्योंकि यह उसे पढ़ाया नहीं गया और वह भी खुद
इसका गुलाम है. परन्तु किसी अच्छे वैद्य के पास जाओगे तो
वह पहले सलाह देगा चाय ना पियें। चाय की हरी
पत्ती पानी में उबाल कर पीने में कोई
बुराई नहीं परन्तु जहां यह फर्मेंट हो कर काली
हुई सारी बुराइयां उसमे आ जाती है। आइये जानते
है कैसे? अंत में विकल्प ज़रूर पढ़ लें: -
हमारे गर्म देश में चाय और गर्मी बढ़ाती है, पित्त
बढ़ाती है। चाय के सेवन करने से शरीर में
उपलब्ध
विटामिन्स नष्ट होते हैं। इसके सेवन से स्मरण शक्ति में दुर्बलता
आती है। - चाय का सेवन लिवर पर बुरा प्रभाव डालता है।
🌞१. चाय का सेवन रक्त आदि की वास्तविक उष्मा को नष्ट
करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
🌞 २. दूध से बनी चाय का सेवन आमाशय पर बुरा प्रभाव
डालता है और पाचन क्रिया को क्षति पहुंचाता है।
🌞 ३. चाय में उपलब्ध कैफीन हृदय पर बुरा प्रभाव
डालती है, अत: चाय का अधिक सेवन प्राय: हृदय के रोग को
उत्पन्न करने में सहायक
होता है।
🌞 ४. चाय में कैफीन तत्व छ: प्रतिशत मात्रा में होता है जो
रक्त को दूषित करने के साथ शरीर के अवयवों को कमजोर
भी करता है।
🌞 ५. चाय पीने से खून गन्दा हो जाता है और चेहरे पर
लाल फुंसियां निकल आती है।
🌞६. जो लोग चाय बहुत पीते है उनकी आंतें
जवाब दे जाती है. कब्ज घर कर जाती है और
मल निष्कासन में कठिनाई आती है।
🌞७. चाय पीने से कैंसर तक होने
की संभावना भी रहती है।
🌞८. चाय से स्नायविक गड़बडियां होती हैं,
कमजोरी और पेट में गैस भी।
🌞९. चाय पीने से अनिद्रा की शिकायत
भी बढ़ती जाती है।
🌞१०. चाय से न्यूरोलाजिकल गड़बड़ियां आ जाती है।
🌞 ११. चाय में उपलब्ध यूरिक एसिड से मूत्राशय या मूत्र नलिकायें
निर्बल
हो जाती हैं, जिसके परिणाम स्वरूप चाय का सेवन करने वाले
व्यक्ति को बार-बार मूत्र आने की समस्या उत्पन्न हो
जाती है।
🌞१२. इससे दांत खराब होते है. - रेलवे स्टेशनों या टी
स्टालों पर बिकने वाली चाय का सेवन यदि न करें तो बेहतर होगा
क्योंकि ये बरतन को साफ किये बिना कई बार इसी में चाय बनाते
रहते हैं जिस कारण कई बार चाय विषैली हो जाती
है। चाय को कभी भी दोबारा गर्म करके न पिएं तो
बेहतर होगा।
🌞 १३. बाज़ार की चाय अक्सर अल्युमीनियम
के भगोने में
खदका कर बनाई जाती है। चाय के अलावा यह
अल्युमीनियम भी घुल कर पेट की
प्रणाली को बार्बाद करने में कम भूमिका नहीं निभाता
है।
🌞 १४. कई बार हम लोग बची हुई चाय को थरमस में
डालकर रख देते हैं इसलिए भूलकर भी ज्यादा देर तक थरमस
में रखी चाय का सेवन न करें। जितना हो सके
चायपत्ती को कम उबालें तथा एक बार चाय बन जाने पर
इस्तेमाल की गई चायपत्ती को फेंक दें।
🌞१५. शरीर में आयरन अवशोषित ना हो पाने से
एनीमिया हो जाता है. - इसमें मौजूद कैफीन लत लगा
देता है. लत हमेशा बुरी ही होती है.
🌞१६. ज़्यादा चाय पिने से खुश्की आ जाती
है.आंतों के स्नायु भी कठोर बन जाते हैं।
🌞१७. चाय के हर कप के साथ एक या अधिक चम्मच शकर
ली जाती है जो वजन बढाती है।
१८. अक्सर लोग चाय के साथ नमकीन , खारे बिस्कुट
,पकौड़ी आदि लेते है. यह विरुद्ध आहार है. इससे त्वचा रोग
होते है.।
🌞 १९. चाय से भूख मर जाती है, दिमाग सूखने लगता है,
गुदा और वीर्याशय ढीले पड़ जाते हैं।
डायबिटीज़ जैसे रोग होते हैं। दिमाग सूखने से उड़ जाने
वाली नींद के कारण आभासित कृत्रिम स्फूर्ति को
स्फूर्ति मान लेना, यह
बड़ी गलती है।
🌞२०. चाय-कॉफी के विनाशकारी व्यसन में फँसे
हुए लोग स्फूर्ति का बहाना बनाकर हारे हुए जुआरी
की तरह व्यसन
में अधिकाधिक गहरे डूबते जाते हैं। वे लोग शरीर, मन, दिमाग
और
पसीने की कमाई को व्यर्थ गँवा देते हैं और
भयंकर व्याधियों के शिकार बन जाते हैं।
🌞 चाय का विकल्प :-🌞
पहले तो संकल्प कर लें की चाय नहीं पियेंगे.
दो दिन से एक हफ्ते तक याद आएगी ; फिर सोचोगे अच्छा
हुआ छोड़ दी.एक दो दिन सिर दर्द हो सकता है.
सुबह ताजगी के लिए गर्म पानी ले. चाहे तो
उसमे आंवले के टुकड़े मिला दे. थोड़ा एलो वेरा मिला दे.
सुबह गर्म पानी में शहद निम्बू डाल के पी
सकते है. - गर्म पानी में तरह तरह की पत्तियाँ
या फूलों की पंखुड़ियां दाल कर पी सकते है. जापान
में लोग ऐसी ही चाय पीते है और
स्वस्थ और दीर्घायु होते है.
कभी पानी में मधुमालती
की पंखुड़ियां , कभी मोगरे की ,
कभी जासवंद , कभी पारिजात आदि डाल कर पियें.
गर्म पानी में लेमन ग्रास , तेजपत्ता , पारिजात ,आदि के
पत्ते या अर्जुन की छाल या इलायची ,
दालचीनी इनमे से एक कुछ डाल कर पियें ।

Benefits of sugar candy

गुड़ खाने से फायदे :
गुड़ खाने से नहीं होती गैस की
दिक्कत
खाना खाने के बाद अक्सर मीठा खाने का मन करता हैं। इसके
लिए सबसे बेहतर है कि आप गुड़ खाएं। गुड़ का सेवन करने से आप
हेल्दी रह सकते हैं।
> पाचन क्रिया को सही रखना -- गुड़ शरीर का
रक्त साफ करता है और मेटाबॉल्जिम ठीक करता है। रोज एक
गिलास पानी या दूध के साथ गुड़ का सेवन पेट को ठंडक देता है।
इससे गैस की दिक्कत नहीं होती। जिन
लोगों को गैस की परेशानी है, वो रोज़ लंच या डिनर के
बाद थोड़ा गुड़ ज़रूर खाएं
> गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है। इसलिए यह एनीमिया के
मरीज़ों के लिए बहुत फायदेमंद है। खासतौर पर महिलाओं के
लिए इसका सेवन बहुत अधिक ज़रूर है
> त्वचा के लिए -- गुड़ ब्लड से खराब टॉक्सिन दूर करता है, जिससे त्वचा
दमकती है और मुहांसे की समस्या
नहीं होती है।
> गुड़ की तासीर गर्म है, इसलिए इसका सेवन
जुकाम और कफ से आराम दिलाता है। जुकाम के दौरान अगर आप कच्चा
गुड़ नहीं खाना चाहते हैं तो चाय या लड्डू में भी
इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
> एनर्जी के लिए -- बुहत ज़्यादा थकान और
कमजोरी महसूस करने पर गुड़ का सेवन करने से आपका
एनर्जी लेवल बढ़ जाता है। गुड़ जल्दी पच जाता
है, इससे शुगर का स्तर भी नहीं बढ़ता। दिनभर
काम करने के बाद जब भी आपको थकान हो, तुरंत गुड़ खाएं।
> गुड़ शरीर के टेंपरेचर को नियंत्रित रखता है। इसमें
एंटी एलर्जिक तत्व हैं, इसलिए दमा के मरीज़ों के
लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है।
> जोड़ों के दर्द में आराम -- रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक का
सेवन करें, इससे जोड़ों के दर्द की दिक्कत नहीं
होगी।
> गुड़ के साथ पके चावल खाने से बैठा हुआ गला व आवाज खुल
जाती है।
> गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से सर्दी में अस्थमा
की परेशानी नहीं होती है।
> जुकाम जम गया हो, तो गुड़ पिघलाकर उसकी
पपड़ी बनाकर खिलाएं।
> गुड़ और घी मिलाकर खाने से कान का दर्द ठीक
हो जाता है।
> भोजन के बाद गुड़ खा लेने से पेट में गैस नहीं
बनती ।
> पांच ग्राम सौंठ दस ग्राम गुड़ के साथ लेने से पीलिया रोग में
लाभ होता है।
> गुड़ का हलवा खाने से स्मरण शक्ति बढती है।
> पांच ग्राम गुड़ को इतने ही सरसों के तेल में मिलाकर खाने से
श्वास रोग से छुटकारा मिलता है।

The Human Body and Food

ऊपर से देखने पर आदमी जैसा दिखाई पड़ता है, वह उसका पूरा शरीर नहीं है, वह केवल उसके शरीरों की पहली पर्त है। जब हम देखते हैं आदमी को तो जो हमें दिखाई पड़ता है, उसे ऋषियों ने 'अन्नमय कोष' कहा है--दि फिजिकल बॉडी।

यह जो शरीर है, यह माता-पिता से उपलब्ध होता है, यह आपका नहीं है; यह पर्त आप नहीं हैं, यह पर्त एक लंबी परंपरा है। हजारों शरीरों ने इस शरीर को निर्मित किया है। आपके मां-बाप आपको जो बीजाणु देते हैं उसमें इस शरीर की पूरी बिल्टन इन प्रोसेस, इस शरीर के होने की सारी संभावना छिपी होती है।

अब तो वैज्ञानिक कहते हैं कि आपके शरीर में जो भी प्रगट होता है पूरे जीवन में, वह सब आपके पहले बीज-कोष में छिपा होता है; कुछ भी नया घटित नहीं होता। आपकी आंख का रंग, आपके बाल का रंग, आपकी चमड़ी का रंग, आपकी उम आपके व्यक्तित्व में जो-जो फलित होगा, वह सब उस बीज में छिपा होता है; वह आप नहीं हैं। उस शरीर की तो लंबी अपनी यात्रा है...आपके माता-पिता से आपको मिला है, उनके माता-पिता से उन्हें मिला है-लंबी यात्रा है... करोड़ों वर्ष की लंबी यात्रा है।

अगर हम अपने शरीर में पीछे लौंटें तो प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में इस जगत का पूरा इतिहास छिपा है। यह जगत पहले दिन बना होगा, उस दिन भी आपके शरीर का कुछ हिस्सा मौजूद था; वही विकसित होते आपका शरीर हुआ है। एक छोटे से बीज-कोष में इस अस्तित्व की सारी कथा छिपी है; वह आपका नहीं है, उसकी लंबी परंपरा है। वह बीज-कोष न मालूम कितने मनुष्यों से, न मालूम कितने पशुओं से, न मालूम कितने पौधों से, न मालूम कितने खनिजों से यात्रा करता हुआ आप तक आया है। वह आपकी पहली पर्त है; उस पर्त को ऋषि अन्नकोष कहते हैं। अन्नकोष इसलिए कहते हैं...कि उसके निर्माण की जो प्रकि'या है वह भोजन से होती है; वह बनता है भोजन से।

प्रत्येक व्यक्ति का शरीर सात साल में बदल जाता है। सभी कुछ बदल जाता है--हड्डी, मांस, मज्जा-सभी कुछ बदल जाती है; एक आदमी सत्तर साल जीता है तो दस बार उसके पूरे शरीर का रूपांतरण हो जाता है। रोज आप जो भोजन ले रहे हैं, वह आपके शरीर को बनाता है; और रोज आप अपने शरीर से मृत शरीर को बाहर फेंक रहे हैं। जब हम कहते हैं कि फलां व्यक्ति का देहावसान हो गया, तो हम अंतिम देहावसान को कहते हैं...जब उसकी आत्मा शरीर को छोड़ देती है।

वैसे व्यक्ति का देहावसान रोज हो रहा है, व्यक्ति का शरीर रोज मर रहा है; आपका शरीर मरे हुऐ हिस्से को रोज बाहर फेंक रहा है। नाखून आप काटते हैं, दर्द नहीं होता, क्योंकि नाखून आपके शरीर का मरा हुआ हिस्सा है। बाल आप काटते हैं, पीड़ा नहीं होती, क्योंकि बाल आपके शरीर के मरे हुए कोष हैं। अगर बाल आपके शरीर के जीवित हिस्से हैं तो काटने से पीड़ा होगी।

आपका शरीर रोज अपने से बाहर फेंक रहा है...एक मजे की बात है कि अक्सर कब' में मुर्दे के बाल और नाखून बढ़ जाते हैं; क्योंकि नाखून और बाल का जिंदगी से कुछ लेना-देना नहीं, मुर्दे के भी बढ़ सकते हैं; वे मरे हुए हिस्से हैं...वे मरे हुए हिस्से हैं, वे अपनी प्रकि'या जारी रख सकते हैं।

भोजन आपके शरीर को रोज नया शरीर दे रहा है, और आपके शरीर से मुर्दा शरीर रोज बाहर फेंका जा रहा है। यह सतत प्रक्रिया है। इसलिए शरीर को अन्नमयकोश कहा है, क्योंकि वह अन्न से ही निर्मित होता है।

और इसलिए बहुत कुछ निर्भर करेगा कि आप कैसा भोजन ले रहे हैं। इस पर बहुत कुछ निर्भर करेगा। आपका आहार सिर्फ जीवन चलाऊ नहीं है, वह आपके व्यक्तित्व की पहली पर्त निर्मित करता है। और उस पर्त के ऊपर बहुत कुछ निर्भर करेगा कि आप भीतर यात्रा कर सकते हैं या नहीं कर सकते हैं; क्योंकि सभी भोजन एक जैसा नहीं है।

कुछ भोजन हैं जो आपको भीतर प्रवेश करने ही न देंगे, जो आपको बाहर ही दौड़ाते रहेंगे; कुछ भोजन हैं जो आपके भीतर चैतन्य को जन्मने ही न देंगे, क्योंकि वे आपको बेहोश ही करते रहेंगे; कुछ भोजन हैं जो आपको कभी शांत न होने देंगे, क्योंकि उस भोजन की प्रकि'या में ही आपके शरीर में एक रेस्टलेसनेस, एक बेचैनी पैदा हो जाती है। रुग्ण भोजन हैं, स्वस्थ भोजन हैं, शुद्ध भोजन हैं, अशुद्ध भोजन हैं।

शुद्ध भोजन उसे कहा गया है, जिससे आपका शरीर अंतर की यात्रा में बाधा न दे-बस; और कोई अर्थ नहीं है। शुद्ध भोजन से सिर्फ इतना ही अर्थ है कि आपका शरीर आपकी अंतर्यात्रा में बाधा न बने।

एक आदमी अपने घर की दीवालें ठोस पत्थर से बना सकता है। कोई आदमी अपने घर की दीवालें कांच से भी बना सकता है; लेकिन कांच पारदर्शी है, बाहर खड़े होकर भी भीतर का दिखाई पड़ता है। ठोस पत्थर की भी दीवाल बन जाती है, तब बाहर खड़े होकर भीतर का दिखाई नहीं पड़ता है।

शरीर भी कांच जैसा पारदर्शी हो सकता है। उस भोजन का नाम शुद्ध भोजन है जो शरीर को पारदर्शी, ट्रान्सपैरेंट बना दे...कि आप बाहर भी चलते रहें तो भी भीतर की झलक आती रहे। शरीर को आप ऐसी दीवाल भी बना सकते हैं कि भीतर जाने का 'याल ही भूल जाये, भीतर की झलक ही मिलनी बंद हो जाये।

सात्विक और असात्विक का इतना ही अर्थ है: आपका शरीर पारदर्शी हो सके...पहली पर्त पारदर्शी हो सके। तो भीतर की यात्रा शुरू होती है। और जब पहली पर्त पारदर्शी होती है तो ही दूसरी पर्त का पता चलता है, नहीं तो पता नहीं चलता। हमें पता ही नहीं चलता कि शरीर के भीतर और भी कोई शरीर है। उसका और कोई कारण नहीं है। योगी को पता चलता है कि शरीर के भीतर एक और शरीर है, क्योंकि उसकी पहली पर्त पारदर्शी हो जाती है; तो उसे दूसरे शरीर की झलक मिलनी शुरू हो जाती है

The Forgotten Hindu Sanskaars

अधिकतर हिन्दू लोग जब किसी से मिलते हैं तो "नमस्ते " या " नमस्कार " कर के एक दुसरे का अभिवादन करते हैं ....अधिकतर लोगो को ये पता नहीं होता की वो नमस्ते क्यूँ करते हैं और इसका क्या अर्थ होता है ...पेश है उन्ही लोगो के लिए ये जानकारी ताकि जब अगली बार किसी से नमस्ते कहे तो कम से कम उन्हें उसका अर्थ अवश्य पता हो |
शास्त्रों में पाँच प्रकार के अभिवादन बतलाये गए है जिन में से एक है "नमस्ते " या "नमस्कार "।
नमस्कार को कई प्रकार से देखा और समझा जा सकता है। संस्कृत में इसे विच्छेद करे तो हम पाएंगे की नमस्ते दो शब्दों से बना है नमः + असते ।
नमः का मतलब होता है झुक गया और असते मतलब सर( अहंकार या अभिमान से भरा ) ...यानि मेरा अहंकार से भरा सर आपके सम्मुख झुक गया । नम: का एक और अर्थ हो सकता है जो है न + में यानी की मेरा नही .....सब कुछ आपका ।
आध्यात्म की दृष्टी से इसमें मनुष्य दुसरे मनुष्य के सामने अपने अंहकार को कम कर रहा है।
नमस्ते करते समय में दोनों हाथो को जोड़ कर एक कर दिया जाता है जिसका अर्थ है की इस अभिवादन के बाद दोनों व्यक्ति के दिमाग मिल गए या एक दिशा में हो गये…!
हम बड़ों के पैर क्यों छूते है ?
भारत में बड़े बुजुर्गो के पाँव छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। ये दरअसल बुजुर्ग, सम्मानित व्यक्ति के द्वारा किए हुए उपकार के प्रतिस्वरुप अपने समर्पण की अभिव्यक्ति होती है। अच्छे भावः से किया हुआ सम्मान के बदले बड़े लोग आशीर्वाद देते है जो एक सकारात्मक ऊर्जा होती है।
आदर के निम्न प्रकार है :
1-प्रत्युथान : किसी के स्वागत में उठ कर खड़े होना
2-नमस्कार : हाथ जोड़ कर सत्कार करना
3-उपसंग्रहण : बड़े, बुजुर्ग, शिक्षक के पाँव छूना
4-साष्टांग : पाँव, घुटने, पेट, सर और हाथ के बल जमीन पर पुरे लेट कर सम्मान करना
5-प्रत्याभिवादन : अभिनन्दन का अभिनन्दन से जवाब देना पर आज कल पश्चिमी संस्कृति के हावी होने के कारण हम नमस्ते ,प्रणाम अदि कहना लगभग भूलते जा रहे हैं अब उनकी जगह "हाय " हेल्लो " गुड मोर्निंग " या "गुड नाईट " जैसे शब्दों ने ले लिया ....जिसके अर्थ और अनर्थ का पता ही नहीं चलता…

Secret of Amarnath Cave

अमरनाथ की गुफा का महत्व सिर्फ इसलिए नहीं है कि यहां हिम शिवलिंग का निर्माण होता है। इस गुफा का महत्व इसलिए भी है कि इसी गुफा में भगवान शिव ने अपनी पत्नी देवी पार्वती को अमरत्व का मंत्र सुनाया था। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव साक्षात श्री अमरनाथ गुफा में विराजमान रहते हैं।भगवान शिव जब पार्वती को अमरकथा सुनाने ले जा रहे थे, तब उन्होंने रास्ते में सबसे पहले पहलगाम में अपने नंदी (बैल) का परित्याग किया। इसके बाद चंदनबाड़ी में अपनी जटा से चंद्रमा को मुक्त किया। शेषनाग नामक झील पर पहुंच कर उन्होंने गले से सर्पों को भी उतार दिया। प्रिय पुत्र श्री गणेश जी को भी उन्होंने महागुणस पर्वत पर छोड़ देने का निश्चय किया। फिर पंचतरणी नामक स्थान पर पहुंच कर भगवान शिव ने पांचों तत्वों का परित्याग किया।
शास्त्रों के अनुसार इसी गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। माता पार्वती के साथ ही इस रहस्य को शुक (तोता) और दो कबूतरों ने भी सुन लिया था। यह शुक बाद में शुकदेव ऋषि के रूप में अमर हो गए, जबकि गुफा में आज भी कई श्रद्धालुओं को कबूतरों का एक जोड़ा दिखाई देता है जिन्हें अमर पक्षी माना जाता है।
पुराणों के अनुसार काशी में दर्शन से दस गुना, प्रयाग से सौ गुना और नैमिषारण्य से हजार गुना पुण्य देने वाले श्री बाबा अमरनाथ का दर्शन है।अमरनाथ गुफा के अंदर बनने वाला हिम शिवलिंग पक्की बर्फ का बनता है जबकि गुफा के बाहर मीलों तक सर्वत्र कच्ची बर्फ ही देखने को मिलती है। मान्यता यह भी है कि गुफा के ऊपर पर्वत पर श्री राम कुंड है।ऐसी मान्यता है कि अमरनाथ गुफा के अंदर हिम शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही मनुष्य को 23 पवित्र तीर्थों के पुण्य के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है।
ऐसी मान्यता है कि इस गुफा की खोज बूटा मलिक नाम के गड़रिए ने की थी। वह एक दिन भेड़ें चराते-चराते बहुत दूर निकल गया। एक जंगल में पहुंचकर उसकी एक साधू से भेंट हो गई। साधू ने बूटा मलिक को कोयले से भरी एक कांगड़ी दे दी। घर पहुंचकर उसने कोयले की जगह सोना पाया तो वह बहुत हैरान हुआ। उसी समय वह साधू का धन्यवाद करने के लिए गया परन्तु वहां साधू को न पाकर एक विशाल गुफा को देखा। उसी दिन से यह स्थान एक तीर्थ बन गया।

Importance of Husband for Wife

एक कॉलेज में Happy married life के ऊपर एक
workshop हो रही थी, जिसमे कुछ
शादीशुदा couple हिस्सा ले रहे थे।जिस समय
प्रोफेसर मंच पर आते है तो वो नोट करते है कि सभी
पति- पत्नी आपस में शादी पर जोक कर
रहे है और हँस रहे है... ये देख कर प्रोफेसर कहते है
कि चलो पहले एक Game खेलते है... उसके बाद हम अपने
विषय पर बातें करेंगे।
सभी खुश हो गए और कहा कोन सा Game ???
.
प्रोफ़ेसर ने एक married लड़की को खड़ा किया और
कहा कि तुम ब्लेक बोर्ड पे तुम्हे जो सबसे अजीज
और तुम्हारे सबसे नजदीक हो ऐसे कुछ लोगो के
25- 30 नाम लिखो.... लड़की ने पहले तो अपने
परिवार के लोगो के नाम लिखे फिर अपने सगे सम्बन्धी,
दोस्तों,पडोसी और सहकर्मियों के नाम लिख दिए...
अब प्रोफ़ेसर ने उसमे से कोई भी कम पसंद हो वैसे
5 नाम मिटाने को कहा...
लड़की ने अपने सहकर्मियों के नाम मिटा दिए...
.
फिर प्रोफ़ेसर ने और 5 नाम मिटाने को कहा...
लड़की ने थोडा सोच के अपने पड़ोसियो के नाम मिटा
दिए...
अब प्रोफ़ेसर ने और 10 नाम मिटाने को कहा...
लड़की ने अपने सगे सम्बन्धी और दोस्तों
के नाम मिटा दिए...
अब बोर्ड पर सिर्फ 4 नाम बचे थे जो उसके मम्मी-
पापा, पति और बच्चे का नाम था..
.
अब प्रोफ़ेसर ने कहा इसमें से और 2 नाम मिटा दो...
लड़की असमंजस में पड गयी बहुत
सोचने के बाद बहुत दुखी होते हुए उसने अपने
मम्मी- पापा का नाम मिटा दिया...
सभी लोग स्तब्ध और शांत थे क्योकि वो जानते थे कि
ये गेम सिर्फ वो लड़की ही
नहीं खेल रही थी उनके
दिमागों में भी यही सब चल रहा था।
अब सिर्फ 2 ही नाम बचे थे... पति और बेटे का...
.
प्रोफ़ेसर ने कहा और एक नाम मिटा दो...
लड़की अब सहमी सी रह
गयी... बहुत सोचने के बाद रोते हुए अपने बेटे का
नाम काट दिया...
प्रोफ़ेसर ने अब उस लड़की को कहा तुम
अपनी जगह पर जाके बैठ जाओ...
और सभी की तरफ गौर से देखा...और
पूछा-
क्या कोई बता सकता है कि ऐसा क्यों हुआ कि सिर्फ पति का
ही नाम बोर्ड पर रह गया।
.
कोई जवाब नहीं दे पाया... सभी मुँह
लटका के बैठे थे...
प्रोफ़ेसर ने फिर उस लड़की को खड़ा किया और कहा...
ऐसा क्यों !
जिसने तुम्हे जन्म दिया और पाल पोस के इतना बड़ा किया उनका
नाम तुमने मिटा दिया...
और तो और तुमने अपनी कोख से जिस बच्चे जन्म
दिया उसका भी नाम तुमने मिटा दिया ?
तो लड़की ने सुबकते हुए जवाब दिया कि अब
मम्मी- पापा बूढ़े हो चुके है और कुछ साल के बाद वो
मुझे और इस दुनिया को छोड़ के चले जायेंगे और मेरा बेटा जब बड़ा
हो जायेगा तो जरूरी नहीं कि वो
शादी के बाद मेरे साथ ही रहे।
पर मेरे पति जब तक मेरी जान में जान है तब तक
मेरा आधा शरीर बनके मेरा साथ निभायेंगे इस लिए मेरे
लिए सबसे अजीज मेरे पति है...
प्रोफ़ेसर और बाकी स्टूडेंट ने तालियों की
गूंज से लड़की को सलामी
दी...
.
प्रोफ़ेसर ने कहा तुमने बिलकुल सही कहा कि तुम
और सभी के बिना रह सकती हो पर
अपने आधे अंग अर्थात अपने पति के बिना नहीं रह
सकती हो...
तो आप सभी सज्जनों एवं देवियों, ध्यान दे कि मजाक
तक तो ठीक है पर हर इंसान का अपना
जीवन साथी ही उसको सब
लोगो से ज्यादा अजीज होता है

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सरकार ने विभिन्न ऑनलाईन सेवा शुरु की है
जिसे आप http://www.india.gov.in/howdo
पेज पर जाकर अपने जरूरत की केटेगरी में चुन सकते हैं, उदाहरण के लिए कुछ इस प्रकार हैं :-

* प्राप्त करे:
1. जन्म प्रमाण
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=1

2. जाति प्रमाण
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=4

3. टोली प्रमाणपत्र
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php

4. अधिवास प्रमाणपत्र
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=5

5. वाहन चालक प्रमाणपत्र
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=6

6. विवाह प्रमाणपत्र
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=3

7. मृत्यु प्रमाणपत्र
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=2

अर्ज करें :
1. पॅन कार्ड
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php

2. Tan कार्ड
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php

3. राशन कार्ड
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=7

4. पासपोर्ट
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php

5. मतदाता सूची में नामांकन
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=10

रजिस्ट्रेशन:
1. जमीन / मालमत्ता
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=9

2. वाहन
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=13

3. राज्य रोजगार एक्सचेंज
http://www.india.gov.in/howdo/howdoi.php?service=12

4. नियोक्ता
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php

5. कंपनी
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6. .IN डोमेन
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7. GOV.IN डोमेन
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php

चेक / ट्रॅक:
1. केंद्र सरकार गृहनिर्माण प्रतीक्षा सूची स्थिति
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php

2. चोरी गये वाहन की स्थिति
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php

3. भूमि अभिलेख
http://www.india.gov.in/landrecords/index.php

4. भारतीय न्यायालय
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php

5. न्यायालयों के आदेश (JUDIS)
http://www.india.gov.in/howdo/otherservice_details.php

6. दैनिक कोर्ट ऑर्डर / प्रकरण स्थिति
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7. भारतीय संसद नियम
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8. परीक्षा परिणाम
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9. स्पीड पोस्ट स्थिति
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10. ऑनलाइन खेती बाजार भाव
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1. ऑनलाईन रेल्वे टिकट
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2. ऑनलाईन टिकट
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3. आयकर
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4. केंद्रीय दक्षता आयोग शिकायत (CVC हा)
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योगदान:
1. प्रधानमंत्री सहयोग निधि
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एनी :
1. इलेक्ट्रॉनिक पत्र
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ग्लोबल नेवीगेशन
1. नागरिक
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2. व्यवसाय
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3. ओवरसीज
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5. भारत को जानें
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7. संचयिका
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8. दस्तावेज
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9. अर्ज
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10. कायदे
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11. नियम
http://www.india.gov.in/govt/rules.php

Good and Bad Habits

सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान कर लेना चाहिए। प्रातः खाली पेट मटके का बासी पानी पीना स्वास्थ्यप्रद है।
तुलसी के पत्ते सूर्योदय के पश्चात ही तोड़ें। दूध में तुलसी के पत्ते नहीं डालने चाहिए तथा दूध के साथ खाने भी नहीं चाहिए। तुलसी के पत्ते खाकर थोड़ा पानी पीना पियें।
जलनेति से पंद्रह सौ प्रकार के लाभ होते हैं। अपने मस्तिष्क में एक प्रकार का विजातिय द्रव्य उत्पन्न होता है। यदि वह द्रव्य वहीं अटक जाता है तो बचपन में ही बाल सफेद होने लगते हैं। इससे नजले की बीमारी भी होती है। यदि वह द्रव्य नाक की तरफ आता है तो सुगन्ध-दुर्गन्ध का पता नहीं चल पाता और जल्दी-जल्दी जुकाम हो जाता है। यदि वह द्रव्य कान की तरफ आता है तो कान बहरे होने लगते हैं और छोटे-मोटे बत्तीस रोग हो सकते हैं। यदि वह द्रव्य दाँत की तरफ आये तो दाँत छोटी उम्र में ही गिरने लगते हैं। यदि आँख की तरफ वह द्रव्य उतरे तो चश्मे लगने लगते हैं। जलनेति यानि नाक से पानी खींचकर मुँह से निकाल देने से वह द्रव्य निकल जाता है। गले के ऊपर के प्रायः सभी रोगों से मुक्ति मिल जाती है।
आईसक्रीम खाने के बाद चाय पीना दाँतों के लिए अत्याधिक हानिकारक होता है।
भोजन को पीना चाहिए तथा पानी को खाना चाहिए। इसका मतलब यह है कि भोजन को इतना चबाओ कि वह पानी की तरह पतला हो जाये और पानी अथवा अन्य पेय पदार्थों को धीरे-धीरे पियो।
किसी भी प्रकार का पेय पदार्थ पीना हो तो दायां नथुना बन्द करके पियें, इससे वह अमृत जैसा हो जाता है। यदि दायाँ स्वर(नथुना) चालू हो और पानी आदि पियें तो जीवनशक्ति(ओज) पतली होने लगती है। ब्रह्मचर्य की रक्षा के लिए, शरीर को तन्दरुस्त रखने के लिए यह प्रयोग करना चाहिए।
तुम चाहे कितनी भी मेहनत करो किन्तु जितना तुम्हारी नसों में ओज है, ब्रह्मचर्य की शक्ति है उतने ही तुम सफल होते हो। जो चाय-कॉफी आदि पीते हैं उनका ओज पतला होकर पेशाब द्वारा नष्ट होता जाता है। अतः ब्रह्मचर्य की रक्षा के लिए चाय-कॉफी जैसे व्यसनों से दूर रहना रहें।
पढ़ने के बाद थोड़ी देर शांत हो जाना चाहिए। जो पढ़ा है उसका मनन करो। शिक्षक स्कूल में जब पढ़ाते हों तब ध्यान से सुनो। उस वक्त मस्ती-मजाक नहीं करना चाहिए। विनोद-मस्ती कम से कम करो और समझने की कोशिश अधिक करो।
जो सूर्योदय के पूर्व नहीं उठता, उसके स्वभाव में तमस छा जाता है। जो सूर्योदय के पूर्व उठता है उसकी बुद्धिशक्ति बढ़ती है।
नींद में से उठकर तुरंत भगवान का ध्यान करो, आत्मस्नान करो। ध्यान में रुचि नहीं होती तो समझना चाहिए कि मन में दोष है। उन्हें निकालने के लिए क्या करना चाहिए?
मन को निर्दोष बनाने के लिए सुबह-शाम, माता-पिता को प्रणाम करना चाहिए, गुरुजनों को प्रणाम करना चाहिए एवं भगवान के नाम का जप करना चाहिए। भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि 'हे भगवान! हे मेरे प्रभु! मेरी ध्यान में रुचि होने लगे, ऐसी कृपा कर दो।' किसी समय गंदे विचार निकल आयें तो समझना चाहिए कि अंदर छुपे हुए विचार निकल रहे हैं। अतः खुश होना चाहिए। 'विचार आया और गया। मेरे राम तो हृदय में ही हैं। ऐसी भावना करनी चाहिए।

Anger Burns your inner soul

क्रोध का ताप‬ आपके संस्कारों को जला सकता है ,,
बहुत समय पहले की बात है। आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र के बीच सोलह दिन तक लगातार शास्त्रार्थ चला। शास्त्रार्थ मेँ निर्णायक थीँ- मंडन मिश्र की धर्म पत्नी देवी भारती। हार-जीत का निर्णय होना बाक़ी था, इसी बीच देवी भारती को
किसी आवश्यक कार्य से कुछ समय के लिये बाहर जाना पड़ गया।
लेकिन जाने से पहले देवी भारती नेँ दोनोँ ही विद्वानोँ के गले मेँ एक-एक फूल माला डालते हुए कहा, येँ दोनो मालाएं मेरी अनुपस्थिति मेँ आपके हार और जीत का फैसला करेँगी। यह कहकर देवी भारती वहाँ से चली गईँ। शास्त्रार्थ की प्रकिया आगे चलती रही।
कुछ देर पश्चात् देवी भारती अपना कार्य पुरा करके लौट आईँ। उन्होँने अपनी निर्णायक नजरोँ से शंकराचार्य और मंडन मिश्र को बारी- बारी से देखा और अपना निर्णय सुना दिया। उनके फैसले के अनुसार आदि शंकराचार्य विजयी घोषित किये गये और उनके पति मंडन मिश्र की पराजय हुई थी।
सभी दर्शक हैरान हो गये कि बिना किसी आधार के इस विदुषी ने अपने पति को ही पराजित करार दे दिया। एक विद्वान नेँ देवी भारती से नम्रतापूर्वक जिज्ञासा की- हे ! देवी आप तो शास्त्रार्थ के मध्य ही चली गई थीँ फिर वापस लौटते ही आपनेँ ऐसा फैसला कैसे दे दिया ?
देवी भारती ने मुस्कुराकर जवाब दिया- जब भी कोई विद्वान शास्त्रार्थ मेँ पराजित होने लगता है, और उसे जब हार की झलक दिखने लगती है तो इस वजह से वह क्रुध्द हो उठता है और मेरे पति के गले की माला उनके क्रोध की ताप से सूख चुकी है जबकि शंकराचार्य जी की माला के फूल अभी भी पहले की भांति ताजे हैँ। इससे ज्ञात होता है कि शंकराचार्य की विजय हुई है।
विदुषी देवी भारती का फैसला सुनकर सभी दंग रह गये, सबने उनकी काफी प्रशंसा की।
दोस्तोँ क्रोध मनुष्य की वह अवस्था है जो जीत के नजदीक पहुँचकर हार का नया रास्ता खोल देता है। क्रोध न सिर्फ हार का दरवाजा खोलता है बल्कि रिश्तोँ मेँ दरार का कारण भी बनता है। इसलिये कभी भी अपने क्रोध के ताप से अपने फूल रूपी गुणों को मुरझाने मत दीजिये।

Conversation with a Hijra

I once asked a hijra to narrate what she considered a sacred story from her community. This is what she told me:

When Ram returned from forest exile after fourteen years, he saw hijras outside the gates of Ayodhya. “Why are you outside, not inside?” he asked. And they replied, “Remember, the people of Ayodhya wanted to follow you into the forest. You told the men to go back. You told the women to go back. We are neither men nor women. You forgot to tell us what to do. So we did not go back. We waited for you to return and tell us what to do.” Ram felt miserable at this oversight. Unknowingly, he had caused the exile of these hijras. He embraced them, showered them with affection, promised all earthly and heavenly joys and took them along with him into his Ayodhya.

This story, so full of despair at abandonment and hope for inclusion, can also be found in cultural anthropologist Serena Nanda’s book on hijras, but it has no textual reference. We can argue it is a made-up fantasy of a marginalized community seeking validation. But that is the purpose of sacred stories. They are subjective truths that validate a community, their customs and beliefs.

But while Ram includes hijras into his Ayodhya, does the republic of India? Hijras see themselves as a third gender, but do their passports say so? Why do we want to force them into one gender or another? And by doing so, do we deem sexual acts of a hijra to be natural or unnatural, legal or criminal?

The Supreme Court judgement upholding IPC Section 377 is not just about gays and lesbians and bisexuals and transsexuals. It is about all queer people, that ‘miniscule’ population with ‘so called’ rights. Incidentally, it is also about straight people who want to express love using non-reproductive organs. Yes, it does seem creepy that someone wants to regulate so private a matter between consenting adults.

The word ‘unnatural’, which is part of this infamous law, came to India with the British. We included it in vocabulary of free India assuming it means the same thing as ‘not normal’ or ‘not culturally acceptable’. But the sages of India, known as rishis – those who saw what others did not see – clearly differentiated between the natural (prakriti) and the cultural (sanskriti).

Nature is governed by matsya nyaya, or the law of the fishes, where the big fish eats the small fish. Matsya nyaya means the same thing as jungle law or might is right or survival of the fittest.

Culture is born when this law of jungle is rejected. Culture creates laws and rules and rituals that seek to help the helpless, give rights to the meek not just the mighty, make room for the unfit not just the fit. To do so is dharma (potential or capability or capacity) for humans.

Humans are unique animals. We possess manas or mind, hence are known as manavas in the Puranas. The human mind has the power to expand (brah, in Sanskrit). Hence every human is a Brahma who inhabits a personal subjective mental reality or brahmanda. This ‘egg of Brahma’ can include people and exclude people. Accordingly a Brahma can make laws that make room for some and don’t make room for others. As is a brahma’s brahmanda, so is his sanskriti. Since manas is elastic, with wisdom, brahmanda can expand and so sanskriti can become increasingly inclusive.

In the Shiva Purana, Shiva beheads Daksha as his sanskriti excludes Shiva who does not align to Daksha’s notion of normal behaviour. Shiva then gives Daksha the head of a goat, reminding him of his loss of humanity.

Shiva is visualized as half a woman (ardha-nari-ishwara). At Mathura, he is worshipped as Gopeshwar, who becomes a gopi to dance with Krishna. At Nathdvara, Krishna wears women’s clothes (stri-vesha). These images and rituals may be seen as asexual devotional metaphors or as tacit approval of diverse genders and sexual behaviours. It all depends on the gaze (darshan) of the devotee gazing upon it. And darshan depends on how much the mind is expanded.

When the mind expands, we move from Brahmin (limited mind or seeking mind) towards Brahmn (unlimited mind or realized mind) and society that we create becomes less judgmental, more affectionate and more accomodating. This is the essence of Upanishadic thinking.

Are we, modern Indians, ready to expand our mind? Will we, like Ram, also take hijras and queer folk into our Ayodhya? This is not about being liberal. It is really about being human.

Source: An article Published in Mumbai Mirror on 15 Dec 2013

Actual Full forms

Do we know actual full form of some words???
🔗News paper =
North East West South past and present events report.
🔗Chess =
Chariot, Horse, Elephant, Soldiers.
🔗Cold =
Chronic Obstructive Lung Disease.
🔗Joke =
Joy of Kids Entertainment.
🔗Aim =
Ambition in Mind.
🔗Date =
Day and Time Evolution.
🔗Eat =
Energy and Taste.
🔗Tea =
Taste and Energy Admitted.
🔗Pen =
Power Enriched in Nib.
🔗Smile =
Sweet Memories in Lips Expression.
🔗Bye =
Be with you Everytime.

Indian Facts

भारत का राष्ट्रीय ध्वज - तिरंगा
भारत का राष्ट्रीय गान - जन-गन-मन
भारत का राष्ट्रीय गीत - वन्दे मातरम्
भारत का राष्ट्रीय चिन्ह - अशोक स्तम्भ
भारत का राष्ट्रीय पंचांग - शक संवत
भारत का राष्ट्रीय वाक्य - सत्यमेव जयते
भारत की राष्ट्रीयता - भारतीयता
भारत की राष्ट्र भाषा - हिंदी
भारत की राष्ट्रीय लिपि - देव नागरी
भारत का राष्ट्रीय ध्वज गीत - हिंद देश
का प्यारा झंडा
भारत का राष्ट्रीय नारा - श्रमेव जयते
भारत की राष्ट्रीय विदेशनीति -गुट निरपेक्ष
भारत का राष्ट्रीय पुरस्कार - भारत रत्न
भारत का राष्ट्रीय सूचना पत्र - श्वेत पत्र
भारत का राष्ट्रीय वृक्ष - बरगद
भारत की राष्ट्रीय मुद्रा - रूपया
भारत की राष्ट्रीय नदी - गंगा
भारत का राष्ट्रीय पक्षी - मोर
भारत का राष्ट्रीय पशु - बाघ
भारत का राष्ट्रीय फूल - कमल
भारत का राष्ट्रीय फल - आम
भारत की राष्ट्रीय योजना - पञ्च वर्षीय योजना
भारत का राष्ट्रीय खेल - हॉकी
भारत की राष्ट्रीय मिठाई - जलेबी
भारत के राष्ट्रीय पर्व 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) और 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस)

Short History of India

563 : गौतम बुद्ध का जन्‍म

540 : महावीर का जन्‍म

327-326 : भारत पर एलेक्‍जेंडर का हमला। इसने भारत और यूरोप के बीच एक भू-मार्ग खोल दिया

313 : जैन परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्‍त का राज्‍याभिषेक

305 : चंद्रगुप्‍त मौर्य के हाथों सेल्‍युकस की पराजय

273-232 : अशोक का शासन

261 : कलिंग की विजय

145-101 : एलारा का क्षेत्र, श्रीलंका के चोल राजा

58 : विक्रम संवत् का आरम्‍भ

78 : शक संवत् का आरम्‍भ

120 : कनिष्‍क का राज्‍याभिषेक

320 : गुप्‍त युग का आरम्‍भ, भारत का स्‍वर्णिम काल

380 : विक्रमादित्‍य का राज्‍याभिषेक

405-411 : चीनी यात्री फाहयान की यात्रा

415 : कुमार गुप्‍त-1 का राज्‍याभि‍षेक

455 : स्‍कंदगुप्‍त का राज्‍याभिषेक

606-647 : हर्षवर्धन का शासन

712 : सिंध पर पहला अरब आक्रमण836 : कन्‍नौज के भोज राजा का राज्‍याभिषेक

985 : चोल शासक राजाराज का राज्‍याभिषेक

998 : सुल्‍तान महमूद का राज्‍याभिषेक

1000 से 1499

1001 : महमूद गजनी द्वारा भारत पर पहला आक्रमण, जिसने पंजाब के शासक जयपाल को हराया था

1025 : महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर का विध्‍वंस

1191 : तराई का पहला युद्ध

1192 : तराई का दूसरा युद्ध

1206 : दिल्‍ली की गद्दी पर कुतुबुद्दीन ऐबक का राज्‍याभिषेक

1210 : कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्‍यु

1221 : भारत पर चंगेज खान का हमला (मंगोल का आक्रमण)

1236 : दिल्‍ली की गद्दी पर रजिया सुल्‍तान का राज्‍याभिषेक

1240 : रजिया सुल्‍तान की मृत्‍यु

1296 : अलाउद्दीन खिलजी का हमला

1316 : अलाउद्दीन खिलजी की मृत्‍यु

1325 : मोहम्‍मद तुगलक का राज्‍याभिषेक

1327 : तुगलकों द्वारा दिल्‍ली से दौलताबाद और फिर दक्‍कन को राजधानी बनाया जाना

1336 : दक्षिण में विजयानगर साम्राज्‍य की स्‍थापना

1351 : फिरोजशाह का राज्‍याभिषेक

1398 : तैमूरलंग द्वारा भारत पर हमला

1469 : गुरुनानक का जन्‍म

1494 : फरघाना में बाबर का राज्‍याभिषेक

1497-98 : वास्‍को-डि-गामा की भारत की पहली यात्रा (केप ऑफ गुड होप के जरिए भारत तक समुद्री रास्‍ते   की खोज)

1500 से 1799

1526 : पानीपत की पहली लड़ाई, बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया- बाबर द्वारा मुगल शासन की स्‍थापना

1527 खानवा की लड़ाई, बाबर ने राणा सांगा को हराया

1530 : बाबर की मृत्‍यु और हुमायूं का राज्‍याभिषेक

1539 : शेरशाह सूरी ने हुमायूं का
हराया और भारतीय का सम्राट बन गया

1540 : कन्‍नौज की लड़ाई

1555 : हुमायूं ने दिल्‍ली की गद्दी को फिर से हथिया लिया

1556 : पानीपत की दूसरी लड़ाई

1565 : तालीकोट की लड़ाई

1576 : हल्‍दीघाटी की लड़ाई- राणा प्रताप ने अकबर को हराया

1582 : अकबर द्वारा दीन-ए-इलाही की स्‍थापना

1597 : राणा प्रताप की मृत्‍यु

1600 : ईस्‍ट इंडिया कंपनी की स्‍थापना

1605 : अकबर की मृत्‍यु और जहाँगीर का राज्‍याभिषेक

1606 : गुरु अर्जुन देव का वध

1611 : नूरजहाँ से जहांगीर का विवाह

1616 : सर थॉमस रो ने जहाँगीर से मुलाकात की

1627 : शिवाजी का जन्‍म और जहांगीर की मृत्‍यु

1628 : शाहजहां भारत के सम्राट बने

1631 : मुमताज महल की मृत्‍यु

1634 : भारत के बंगाल में अंग्रेजों को व्‍यापार करने की अनुमति दे दी गई

1659 : औरंगजेब का राज्‍याभिषेक, शाहजहाँ को कैद कर लिया गया

1665 : औरंगजेब द्वारा शिवाजी को कैद कर लिया गया

1680 : शिवाजी की मृत्‍यु

1707 : औरंगजेब की मृत्‍यु

1708 : गुरु गोबिंद सिंह की मृत्‍यु

1739 : नादिरशाह का भारत पर हमला

1757 : प्‍लासी की लड़ाई, लॉर्ड क्‍लाइव के हाथों भारत में अंग्रेजों के राजनीतिक शासन की स्‍थापना 1761पानीपत की तीसरी लड़ाई, शाहआलम द्वितीय भारत के सम्राट बने

1764 : बक्‍सर की लड़ाई

1765 : क्‍लाइव को भारत में कंपनी का गर्वनर नियुक्‍त किया गया

1767-69 : पहला मैसूर युद्ध

1770 : बंगाल का महान अकाल

1780 : महाराजा रणजीत सिंह का जन्‍म

1780-84 : दूसरा मैसूर युद्ध

1784 : पिट्स अधिनियम

1793 : बंगाल में स्‍थायी बंदोबस्‍त

1799 : चौथा मैसूर युद्ध- टीपू सुल्‍तान की मृत्‍यु

1800 – 1900संपादित करें

1802 : बेसेन की संधि

1809 : अमृतसर की संधि

1829 : सती प्रथा को प्रतिबंधित किया गया

1830 : ब्रह्म समाज के संस्‍थापक राजाराम मोहन राय की इंग्‍लैंड की यात्रा

1833 : राजाराम मोहन राय की मृत्‍यु

1839 : महाराजा रणजीत सिंह की मृत्‍यु

1839-42 : पहला अफगान युद्ध

1845-46 : पहला अंग्रेज-सिक्‍ख युद्ध

1852 : दूसरा अंग्रेज-बर्मा युद्ध

1853 : बांबे से थाने के बीच पहली रेलवे लाइन और कलकत्‍ता में टेलीग्राफ लाइन खोली गई

1857 : स्‍वतंत्रता का पहला संग्राम (या सिपाही विद्रोह)

1861 : रबीन्‍द्रनाथ टैगोर का जन्‍म

1869 : महात्‍मा गांधी का जन्‍म

1885 : भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस की स्‍थापना

1889 : जवाहरलाल नेहरु का जन्‍म

1897 : सुभाष चंद्र बोस का जन्‍म

1900 से भारत की स्वतंत्रतता तक

1904 : तिब्‍बत की यात्रा

1905 : लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल का पहला बंटवारा

1906 : मुस्लिम लीग की स्‍थापना

1911 : दिल्‍ली दरबार- ब्रिटिश के राजा और रानी की भारत यात्रा- दिल्‍ली भारत की राजधानी बनी

1916 : पहले विश्‍व युद्ध की शुरुआत

1916 : मुस्लिम लीग और कांग्रेस द्वारा लखनऊ समझौते पर हस्‍‍ताक्षर

1918 : पहले विश्‍व युद्ध की समाप्ति

1919 : मताधिकार पर साउथबरो कमिटी, मांटेग्‍यू-चेम्‍सफोर्ड सुधार- अमृतसर में जालियाँवाला बाग हत्‍याकांड

1920 : खिलाफत आंदोलन की शुरुआत

1927 : साइमन कमीशन का बहिष्‍कार, भारत में प्रसारण की शुरुआत

1928 : लाला लाजपतराय की मृत्‍यु (शेर-ए-पंजाब)

1929 : लॉर्ड ऑर्वम समझौता, लाहौर कांग्रेस में पूर्ण स्‍वतंत्रता का प्रस्‍ताव पास

1930 : सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत- महात्‍मा गांधी द्वारा दांडी मार्च (अप्रैल 6, 1930)

1931 : गांधी-इर्विन समझौता

1935 : भारत सरकार अधिनियम पारित

1937 : प्रांतीय स्‍वायतता, कांग्रेस मंत्रियों का पदग्रहण

1941 : रबीन्‍द्रनाथ टैगोर की मृत्‍यु, भारत से सुभाष चंद्र बोस का पलायन

1942 : क्रिप्‍स मिशन के भारत आगमन पर भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत

1943-44 : नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने प्रांतीय आजाद हिंदू हुकूमत, भारतीय राष्‍ट्रीय सेना की स्‍थापना की और बंगाल में अकाल

1945 : लाल‍ किले में आईएनए का ट्रायल, शिमला समझौता और द्वितीय विश्‍व युद्ध की समाप्ति

1946 : ब्रिटिश कैबिनेट मिशन की भारत यात्रा- केंद्र में अंतरिम सरकार का गठन

1947 : भारत का विभाजन व स्वतंत्रता

आजादी के बाद का इतिहास इस प्रकार है

1947 : 15 अगस्त को देश को अंग्रेजों की गुलामी से निजात मिली।

1948 : 30 जनवरी को महात्मा गाँधी की हत्या। इसी वर्ष भारतीय हॉकी टीम ने लंदन ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीता।

1950 : 26 जनवरी को भारत गणतंत्र बना। संविधान लागू।

1951 : देश की पहली पंचवर्षीय योजना लागू।

1952 : देश में पहले आम चुनाव। कांग्रेस 489 में से 364 सीटें जीतकर सत्ता पर काबिज। हेलसिंकी ओलिंपिक में भारतीय हॉकी टीम को स्वर्णिम सफलता।

1954 : भारत और चीन के बीच पंचशील समझौता।

1956 : राज्यों का पुनर्गठन।

1960 : भारत और पाकिस्तान में सिंधु जल समझौता।

1962 : अक्टूबर में चीन ने भारत पर हमला किया। नवंबर में चीन का दूसरा हमला। आजादी की फिजा में साँस ले रहे देश के युवकों के लिए पहली गंभीर चुनौती।

1963 : भारत ने पहला रॉकेट प्रक्षेपण किया।

1964 : जवाहरलाल नेहरू की मौत। लालबहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने।

1965 : कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच दूसरी जंग।

1966 : लालबहादुर शास्त्री का निधन। इंदिरा गाँधी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। ऑपरेशन फ्लड की शुरुआत।

1967 : हरित क्रांति की शुरुआत।

1969 : कांग्रेस का विभाजन। बैंकों का राष्ट्रीयकरण। पहली सुपरफास्ट रेलगाड़ी राजधानी एक्सप्रेस नई दिल्ली से हावड़ा के बीच दौड़ी। रेलवे की एक बड़ी उपलब्धि।

1971 : भारत और पाकिस्तान के बीच जंग। बांग्लादेश का उदय। पाकिस्तान की करारी हार।

1972 : भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौता।

1974 : 18 मई 1974 को पोखरन में परमाणु परीक्षण कर भारत छठी परमाणु ताकत बना।

1975 : प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की। जयप्रकाश नारायण, जॉर्ज फर्नांडीस और अटलबिहारी वाजपेयी सहित कई विपक्षी नेता गिरफ्तार। प्रेस की आजादी पर प्रतिबंध। भारत के पहले उपग्रह आर्यभट्ट का प्रक्षेपण। फिल्म शोले ने बॉक्स आफिस के सारे कीर्तिमान तोड़े।

1976 : भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता एक्सप्रेस शुरू।

1977 : कांग्रेस की हार के बाद देश में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनी। आंध्रप्रदेश में समुद्री तूफान 35 हजार की मौत।

1978 : भारत की पहली परखनली शिशु दुर्गा (कनुप्रिया अग्रवाल) का जन्म।

1979 : अनुभव के अभाव में पहली गैर कांग्रेसी सरकार का पतन। वंचितों और पीड़ितों की मदद के लिए मदर टेरेसा को नोबेल पुरस्कार।

1980 : विमान दुर्घटना में संजय गाँधी की अप्रत्याशित मौत। राजीव गाँधी का भारतीय राजनीति में पदार्पण। प्रकाश पादुकोण ने भारत के लिए पहली बार आल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट जीता। मास्को ओलिंपिक में भारत को हॉकी का स्वर्ण।

1981 : टोमोरिल का संश्लेषण कर भारतीय चिकित्सा विज्ञानियों ने बड़ी सफलता हासिल की।

1982 : भारत ने नवें एशियाई खेलों का सफल आयोजन किया। देश में रंगीन टेलीविजन की शुरुआत।

1983 : भारतीय क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार विश्वकप जीता। भारत का अपना पहला बहुउद्देश्यीय संचार और मौसम उपग्रह इन्सेट-1बी प्रक्षेपित। मारुति-800 सड़कों पर उतरी।

1984 : ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत आतंकवादियों के सफाए के लिए स्वर्ण मंदिर में सेना का प्रवेश। सिख अंगरक्षक के हाथों प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या। देश भर में सिख विरोधी दंगे। भोपाल में यूनियन कार्बाइड संयंत्र में जहरीली गैस के रिसाव से हजारों की मौत। राकेश शर्मा अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने।

1985 : दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन की स्थापना। भारतीय क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर विश्व क्रिकेट श्रृंखला जीती। कनाडा के टोरंटो से मुंबई आ रहा एयर इंडिया का विमान 329 यात्रियों के साथ दुर्घटनाग्रस्त।

1986 : नई शिक्षा नीति लागू चेन्नई में एड्स का पहला मामला सामने।

1987 : बोफोर्स तोप सौदे को लेकर राजीव गाँधी दागदार। भारत के पहले ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद विश्व जूनियर शतरंज चैंपियन।

1988 : सतह से सतह पर मार करने वाले पृथ्वी प्रक्षेपास्त का सफल परीक्षण।

1990 : मंडल आयोग की सिफारिशें लागू। देश में केबल और सैटेलाइट टेलीविजन की शुरुआत।

1991 : श्रीपेरूंबदूर में आत्मघाती हमले में राजीव गाँधी की मौत। देश में आर्थिक सुधारों की शुरुआत। देश के पहले सुपर कंप्यूटर परम का निर्माण।

1992 : अयोध्या में विवादित ढाँचा ध्वस्त। शेयर बाजार में हर्षद मेहता का हजारों करोड़ रुपए का घोटाला।

1993 : मुंबई में श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट सैकड़ों की मौत। भारत में निजी विमान सेवा का संचालन शुरू।

1994 : सुष्मिता सेन ने ब्रह्मांड सुंदरी का खिताब जीता। ऐश्वर्य राय विश्व सुंदरी बनीं। पीएसएलवी की सफल उड़ान।

1995 : देश में मोबाइल सेवा शुरू।

1997 : मदर टेरेसा का देहांत। पहली भारतीय महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला कोलंबिया से अंतरिक्ष रवाना।

1998 : भारत ने एक और परमाणु परीक्षण किया। पश्चिमी देशों की भृकुटी तनी।

1999 : भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता की कोशिशों के बीच कारगिल में भारत और पाकिस्तान की सेना में फिर टकराव। पाकिस्तान की करारी हार। इंडियन एयरलाइंस का अगवा विमान तीन आतंकवादियों की रिहाई के बाद छोड़ा गया।

2001 : देश के लोकतंत्र के हस्ताक्षर संसद भवन पर आतंकी हमला। गुजरात में भूकंप। हजारों की मौत।

2002 : गोधरा रेलवे स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस पर हमले के बाद गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा। गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर हमला। दिल्ली मेट्रो की शुरुआत।

2003 : अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर लौट रहा कोलंबिया दुर्घटनाग्रस्त। कल्पना चावला की मौत।

2004 : सुनामी के कहर से दक्षिण भारत के राज्यों में भीषण तबाही। 35 हजार की मौत। राज्यवर्धनसिंह राठौर ने एथेंस ओलिंपिक की निशानेबाजी स्पर्धा में भारत के लिए पहला व्यक्तिगत रजत जीता।

2005 : जम्मू-कश्मीर में प्रलंयकारी भूकंप में हजारों लोगों की मौत। लाखों बेघर।

2006 : मुंबई में श्रृंखलाबद्ध बम धमाके सैकड़ों की मौत।

2007 : प्रतिभा पाटिल देश में पहली महिला राष्ट्रपति बनी। अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण परमाणु करार।