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Tuesday, August 4, 2015

Murder of an Unborn girl child

गर्भपात करवाना गलत माना गया है, कृपया इस लेख को अवश्य पढ़े
 और
 अगर इसे पढ़ कर आपके दिल की धड़कने बढ़ जाये
 तो शेयर
 अवश्य करे |
 अमेरिका में सन 1984 में एक सम्मेलन हुआ था - 'नेशनल राइट्स
 टू लाईफ
 कन्वैन्शन'। इस सम्मेलन के एक प्रतिनिधि ने डॉ॰ बर्नार्ड
 नेथेनसन के
 द्वारा गर्भपात
 की बनायी गयी एक
 अल्ट्रासाउण्ड फिल्म 'साइलेण्ट
 स्क्रीम' (गूँगी चीख)
 का जो विवरण
 दिया था, वह इस प्रकार है- 'गर्भ की वह मासूम
 बच्ची अभी 15 सप्ताह
 की थी व काफी चुस्त
 थी।
 हम उसे अपनी माँ की कोख मेँ खेलते,
 करवट बदलते
 व अंगूठा चूसते हुए देख रहे थे। उसके दिल
 की धड़कनों को भी हम देख पा रहे थे और
 वह उस
 समय 120 की साधारण गति से धड़क रहा था। सब कुछ
 बिलकुल
 सामान्य था; किन्तु जैसे ही पहले औजार (सक्सन
 पम्प) ने
 गर्भाशय की दीवार को छुआ, वह मासूम
 बच्ची डर से एकदम घूमकर सिकुड़
 गयी और उसके
 दिल की धड़कन काफी बढ़
 गयी।
 हालांकि अभी तक किसी औजार ने
 बच्ची को छुआ तक
 भी नहीं था, लेकिन
 उसे अनुभव हो गया था कि कोई चीज उसके आरामगाह,
 उसके
 सुरक्षित क्षेत्र पर हमला करने का प्रयत्न कर
 रही है। हम
 दहशत से भरे यह देख रहे थे कि किस तरह वह औजार उस
 नन्हीं-मुन्नी मासूम गुड़िया-
 सी बच्ची के टुकड़े-टुकड़े कर रहा था।
 पहले कमर,
 फिर पैर आदि के टुकड़े ऐसे काटे जा रहे थे जैसे वह
 जीवित
 प्राणी न होकर कोई गाजर-मूली हो और वह
 बच्ची दर्द से छटपटाती हुई, सिकुड़कर
 घूम-घूमकर
 तड़पती हुई इस हत्यारे औजार से बचने का प्रयत्न
 कर
 रही थी। वह इस बुरी तरह
 डर
 गयी थी कि एक समय उसके दिल
 की धड़कन 200 तक पहुँच गयी! मैँने
 स्वंय
 अपनी आँखों से उसको अपना सिर पीछे
 झटकते व
 मुँह खोलकर चीखने का प्रयत्न करते हुए देखा, जिसे
 डॉ॰
 नेथेनसन ने उचित
 ही 'गूँगी चीख'
 या 'मूक पुकार' कहा है। अंत मेँ हमने वह नृशंस
 वीभत्स दृश्य
 भी देखा, जब
 सँडसी उसकी खोपड़ी को तोड़ने
 के लिए
 तलाश रही थी और फिर दबाकर उस कठोर
 खोपड़ी को तोड़
 रही थी क्योँकि सिर
 का वह भाग बगैर तोड़े सक्शन ट्यूब के माध्यम से बाहर
 नहीं निकाला जा सकता था।' हत्या के इस
 वीभत्स
 खेल को सम्पन्न करने में करीब पन्द्रह मिनट
 का समय
 लगा और इसके दर्दनाक दृश्य का अनुमान इससे अधिक और कैसे
 लगाया जा सकता है कि जिस डॉक्टर ने यह गर्भपात किया था और
 जिसने मात्र
 कौतूहलवश इसकी फिल्म
 बनवा ली थी,
 उसने जब स्वयं इस फिल्म को देखा तो वह
 अपना क्लीनिक
 छोड़कर चला गया और फिर वापस नहीं आया ! —
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 किसी अजन्मी बच्ची -
 लडकी की जान बचा सकता है!

 "Save Girl

Side Effects of Tea

चाय के दुष्प्रभाव 🌞
चाय पिने वाले इसे जरूर पढ़े !!!!!!!!!!!!!!
सिर्फ दो सौ वर्ष पहले तक भारतीय घर में चाय
नहीं होती थी। आज कोई
भी घर आये अतिथि को पहले चाय पूछता है। ये बदलाव
अंग्रेजों की देन है। कई लोग ऑफिस में दिन भर चाय लेते रहते
है., यहाँ तक की उपवास में भी चाय लेते है ।
किसी भी डॉक्टर के पास जायेंगे तो वो शराब - सिगरेट
- तम्बाखू छोड़ने को कहेगा , पर चाय नहीं,
क्योंकि यह उसे पढ़ाया नहीं गया और वह भी खुद
इसका गुलाम है. परन्तु किसी अच्छे वैद्य के पास जाओगे तो
वह पहले सलाह देगा चाय ना पियें। चाय की हरी
पत्ती पानी में उबाल कर पीने में कोई
बुराई नहीं परन्तु जहां यह फर्मेंट हो कर काली
हुई सारी बुराइयां उसमे आ जाती है। आइये जानते
है कैसे? अंत में विकल्प ज़रूर पढ़ लें: -
हमारे गर्म देश में चाय और गर्मी बढ़ाती है, पित्त
बढ़ाती है। चाय के सेवन करने से शरीर में
उपलब्ध
विटामिन्स नष्ट होते हैं। इसके सेवन से स्मरण शक्ति में दुर्बलता
आती है। - चाय का सेवन लिवर पर बुरा प्रभाव डालता है।
🌞१. चाय का सेवन रक्त आदि की वास्तविक उष्मा को नष्ट
करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
🌞 २. दूध से बनी चाय का सेवन आमाशय पर बुरा प्रभाव
डालता है और पाचन क्रिया को क्षति पहुंचाता है।
🌞 ३. चाय में उपलब्ध कैफीन हृदय पर बुरा प्रभाव
डालती है, अत: चाय का अधिक सेवन प्राय: हृदय के रोग को
उत्पन्न करने में सहायक
होता है।
🌞 ४. चाय में कैफीन तत्व छ: प्रतिशत मात्रा में होता है जो
रक्त को दूषित करने के साथ शरीर के अवयवों को कमजोर
भी करता है।
🌞 ५. चाय पीने से खून गन्दा हो जाता है और चेहरे पर
लाल फुंसियां निकल आती है।
🌞६. जो लोग चाय बहुत पीते है उनकी आंतें
जवाब दे जाती है. कब्ज घर कर जाती है और
मल निष्कासन में कठिनाई आती है।
🌞७. चाय पीने से कैंसर तक होने
की संभावना भी रहती है।
🌞८. चाय से स्नायविक गड़बडियां होती हैं,
कमजोरी और पेट में गैस भी।
🌞९. चाय पीने से अनिद्रा की शिकायत
भी बढ़ती जाती है।
🌞१०. चाय से न्यूरोलाजिकल गड़बड़ियां आ जाती है।
🌞 ११. चाय में उपलब्ध यूरिक एसिड से मूत्राशय या मूत्र नलिकायें
निर्बल
हो जाती हैं, जिसके परिणाम स्वरूप चाय का सेवन करने वाले
व्यक्ति को बार-बार मूत्र आने की समस्या उत्पन्न हो
जाती है।
🌞१२. इससे दांत खराब होते है. - रेलवे स्टेशनों या टी
स्टालों पर बिकने वाली चाय का सेवन यदि न करें तो बेहतर होगा
क्योंकि ये बरतन को साफ किये बिना कई बार इसी में चाय बनाते
रहते हैं जिस कारण कई बार चाय विषैली हो जाती
है। चाय को कभी भी दोबारा गर्म करके न पिएं तो
बेहतर होगा।
🌞 १३. बाज़ार की चाय अक्सर अल्युमीनियम
के भगोने में
खदका कर बनाई जाती है। चाय के अलावा यह
अल्युमीनियम भी घुल कर पेट की
प्रणाली को बार्बाद करने में कम भूमिका नहीं निभाता
है।
🌞 १४. कई बार हम लोग बची हुई चाय को थरमस में
डालकर रख देते हैं इसलिए भूलकर भी ज्यादा देर तक थरमस
में रखी चाय का सेवन न करें। जितना हो सके
चायपत्ती को कम उबालें तथा एक बार चाय बन जाने पर
इस्तेमाल की गई चायपत्ती को फेंक दें।
🌞१५. शरीर में आयरन अवशोषित ना हो पाने से
एनीमिया हो जाता है. - इसमें मौजूद कैफीन लत लगा
देता है. लत हमेशा बुरी ही होती है.
🌞१६. ज़्यादा चाय पिने से खुश्की आ जाती
है.आंतों के स्नायु भी कठोर बन जाते हैं।
🌞१७. चाय के हर कप के साथ एक या अधिक चम्मच शकर
ली जाती है जो वजन बढाती है।
१८. अक्सर लोग चाय के साथ नमकीन , खारे बिस्कुट
,पकौड़ी आदि लेते है. यह विरुद्ध आहार है. इससे त्वचा रोग
होते है.।
🌞 १९. चाय से भूख मर जाती है, दिमाग सूखने लगता है,
गुदा और वीर्याशय ढीले पड़ जाते हैं।
डायबिटीज़ जैसे रोग होते हैं। दिमाग सूखने से उड़ जाने
वाली नींद के कारण आभासित कृत्रिम स्फूर्ति को
स्फूर्ति मान लेना, यह
बड़ी गलती है।
🌞२०. चाय-कॉफी के विनाशकारी व्यसन में फँसे
हुए लोग स्फूर्ति का बहाना बनाकर हारे हुए जुआरी
की तरह व्यसन
में अधिकाधिक गहरे डूबते जाते हैं। वे लोग शरीर, मन, दिमाग
और
पसीने की कमाई को व्यर्थ गँवा देते हैं और
भयंकर व्याधियों के शिकार बन जाते हैं।
🌞 चाय का विकल्प :-🌞
पहले तो संकल्प कर लें की चाय नहीं पियेंगे.
दो दिन से एक हफ्ते तक याद आएगी ; फिर सोचोगे अच्छा
हुआ छोड़ दी.एक दो दिन सिर दर्द हो सकता है.
सुबह ताजगी के लिए गर्म पानी ले. चाहे तो
उसमे आंवले के टुकड़े मिला दे. थोड़ा एलो वेरा मिला दे.
सुबह गर्म पानी में शहद निम्बू डाल के पी
सकते है. - गर्म पानी में तरह तरह की पत्तियाँ
या फूलों की पंखुड़ियां दाल कर पी सकते है. जापान
में लोग ऐसी ही चाय पीते है और
स्वस्थ और दीर्घायु होते है.
कभी पानी में मधुमालती
की पंखुड़ियां , कभी मोगरे की ,
कभी जासवंद , कभी पारिजात आदि डाल कर पियें.
गर्म पानी में लेमन ग्रास , तेजपत्ता , पारिजात ,आदि के
पत्ते या अर्जुन की छाल या इलायची ,
दालचीनी इनमे से एक कुछ डाल कर पियें ।

Benefits of sugar candy

गुड़ खाने से फायदे :
गुड़ खाने से नहीं होती गैस की
दिक्कत
खाना खाने के बाद अक्सर मीठा खाने का मन करता हैं। इसके
लिए सबसे बेहतर है कि आप गुड़ खाएं। गुड़ का सेवन करने से आप
हेल्दी रह सकते हैं।
> पाचन क्रिया को सही रखना -- गुड़ शरीर का
रक्त साफ करता है और मेटाबॉल्जिम ठीक करता है। रोज एक
गिलास पानी या दूध के साथ गुड़ का सेवन पेट को ठंडक देता है।
इससे गैस की दिक्कत नहीं होती। जिन
लोगों को गैस की परेशानी है, वो रोज़ लंच या डिनर के
बाद थोड़ा गुड़ ज़रूर खाएं
> गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है। इसलिए यह एनीमिया के
मरीज़ों के लिए बहुत फायदेमंद है। खासतौर पर महिलाओं के
लिए इसका सेवन बहुत अधिक ज़रूर है
> त्वचा के लिए -- गुड़ ब्लड से खराब टॉक्सिन दूर करता है, जिससे त्वचा
दमकती है और मुहांसे की समस्या
नहीं होती है।
> गुड़ की तासीर गर्म है, इसलिए इसका सेवन
जुकाम और कफ से आराम दिलाता है। जुकाम के दौरान अगर आप कच्चा
गुड़ नहीं खाना चाहते हैं तो चाय या लड्डू में भी
इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
> एनर्जी के लिए -- बुहत ज़्यादा थकान और
कमजोरी महसूस करने पर गुड़ का सेवन करने से आपका
एनर्जी लेवल बढ़ जाता है। गुड़ जल्दी पच जाता
है, इससे शुगर का स्तर भी नहीं बढ़ता। दिनभर
काम करने के बाद जब भी आपको थकान हो, तुरंत गुड़ खाएं।
> गुड़ शरीर के टेंपरेचर को नियंत्रित रखता है। इसमें
एंटी एलर्जिक तत्व हैं, इसलिए दमा के मरीज़ों के
लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है।
> जोड़ों के दर्द में आराम -- रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक का
सेवन करें, इससे जोड़ों के दर्द की दिक्कत नहीं
होगी।
> गुड़ के साथ पके चावल खाने से बैठा हुआ गला व आवाज खुल
जाती है।
> गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से सर्दी में अस्थमा
की परेशानी नहीं होती है।
> जुकाम जम गया हो, तो गुड़ पिघलाकर उसकी
पपड़ी बनाकर खिलाएं।
> गुड़ और घी मिलाकर खाने से कान का दर्द ठीक
हो जाता है।
> भोजन के बाद गुड़ खा लेने से पेट में गैस नहीं
बनती ।
> पांच ग्राम सौंठ दस ग्राम गुड़ के साथ लेने से पीलिया रोग में
लाभ होता है।
> गुड़ का हलवा खाने से स्मरण शक्ति बढती है।
> पांच ग्राम गुड़ को इतने ही सरसों के तेल में मिलाकर खाने से
श्वास रोग से छुटकारा मिलता है।