विश्व के समस्त सनातन धर्मियों को "गुरु पूर्णिमा"की अनंत शुभकामनायें !!!
भगवान विष्णु के ज्ञानावतार,पुराणों के रचयिता विश्व गुरु महर्षि वेदव्यास की स्मृति में गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है।
गुरु महिमा !!
गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुःगुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।।
गुरु ब्रह्मा है, गुरु विष्णु है, गुरु हि शंकर है;
गुरु ही साक्षात् परब्रह्म है; उन सद्गुरु को प्रणाम ।
प्रेरकः सूचकश्वैव वाचको दर्शकस्तथा ।
शिक्षको बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः ॥
प्रेरणा देनेवाले, सूचना देनेवाले, (सच) बतानेवाले, (रास्ता) दिखानेवाले, शिक्षा देनेवाले, और बोध कराने वाले – ये सब गुरु समान है ।
विद्वत्त्वं दक्षता शीलं सङ्कान्तिरनुशीलनम् ।
शिक्षकस्य गुणाः सप्त सचेतस्त्वं प्रसन्नता ॥
विद्वत्व, दक्षता, शील, संक्रांति, अनुशीलन, सचेतत्व, और प्रसन्नता – ये सात शिक्षक के गुण हैं ।
दुग्धेन धेनुः कुसुमेन वल्ली शीलेन भार्या कमलेन तोयम् ।
गुरुं विना भाति न चैव शिष्यःशमेन विद्या नगरी जनेन ॥
जैसे दूध बगैर गाय, फूल बगैर लता, शील बगैर भार्या, कमल बगैर जल, शम बगैर विद्या, और लोग बगैर नगर शोभा नही देते,वैसे हि गुरु बिना शिष्य शोभा नहि देता ।
भगवान विष्णु के ज्ञानावतार,पुराणों के रचयिता विश्व गुरु महर्षि वेदव्यास की स्मृति में गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है।
गुरु महिमा !!
गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुःगुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।।
गुरु ब्रह्मा है, गुरु विष्णु है, गुरु हि शंकर है;
गुरु ही साक्षात् परब्रह्म है; उन सद्गुरु को प्रणाम ।
प्रेरकः सूचकश्वैव वाचको दर्शकस्तथा ।
शिक्षको बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः ॥
प्रेरणा देनेवाले, सूचना देनेवाले, (सच) बतानेवाले, (रास्ता) दिखानेवाले, शिक्षा देनेवाले, और बोध कराने वाले – ये सब गुरु समान है ।
विद्वत्त्वं दक्षता शीलं सङ्कान्तिरनुशीलनम् ।
शिक्षकस्य गुणाः सप्त सचेतस्त्वं प्रसन्नता ॥
विद्वत्व, दक्षता, शील, संक्रांति, अनुशीलन, सचेतत्व, और प्रसन्नता – ये सात शिक्षक के गुण हैं ।
दुग्धेन धेनुः कुसुमेन वल्ली शीलेन भार्या कमलेन तोयम् ।
गुरुं विना भाति न चैव शिष्यःशमेन विद्या नगरी जनेन ॥
जैसे दूध बगैर गाय, फूल बगैर लता, शील बगैर भार्या, कमल बगैर जल, शम बगैर विद्या, और लोग बगैर नगर शोभा नही देते,वैसे हि गुरु बिना शिष्य शोभा नहि देता ।
विद्वत्त्वं दक्षता शीलं सङ्कान्तिरनुशीलनम् ।
ReplyDeleteशिक्षकस्य गुणाः सप्त सचेतस्त्वं प्रसन्नता ॥
please tell me the source of this shlok...
गुरवे नमः
ReplyDelete