एक ही विषय पर ५ महान शायरों का नज़रिया...
मिर्ज़ा ग़ालिब :
शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर...
या वो जगह बता जहाँ ख़ुदा नहीं.
इक़बाल :
मस्जिद ख़ुदा का घर है,पीने की जगह नहीं...
काफिर के दिल में जा, वहाँ ख़ुदा नहीं.
अहमद फ़राज़ :
काफिर के दिल से आया हूँ मैं ये देखकर...
ख़ुदा मौजूद है वहाँ पर उसे पता नहीं.
वसी :
ख़ुदा तो मौजूद दुनियाँ में हर जगह हैँ...
तू जन्नत में जा वहाँ पीना मना नहीं.
साकी :
पीता हूँ गम -ए - दुनियाँ भुलाने को...
जन्नत में कौन सा ग़म है, इसलिए वहाँ पीने में मज़ा नहीं.
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