Tuesday, August 4, 2015

Few Truths of Life

आगे सफर था और पीछे हमसफर था....
रूकते तो सफर छूट जाता और चलते तो हम सफर छूट जाता...

मंजिल की भी हसरत थी और उनसे भी मोहब्बत थी..
ए दिल तू ही बता...उस वक्त मैं कहाँ जाता...

मुद्दत का सफर भी था और बरसो का हम सफर भी था
रूकते तो बिछड जाते और चलते तो बिखर जाते....

यूँ समँझ लो....

प्यास लगी थी गजब की...मगर पानी मे जहर था...
पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते...
बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!

वक़्त ने कहा.....काश थोड़ा और सब्र होता!!!
सब्र ने कहा....काश थोड़ा और वक़्त होता!!!
सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब...।। आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर।।
"हुनर" सड़कों पर तमाशा करता है और "किस्मत" महलों में राज करती है!!
"शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,
पर चुप इसलिये हु कि, जो दिया तूने,
 वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता"...
बहुत देखा जीवन में
समझदार बन कर


पर ख़ुशी हमेशा
पागलपन से ही मिली है ।।

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इसे इत्तेफाक समझो

या दर्द भरी हकीकत,

आँख जब भी नम हुई,

वजह कोई अपना ही था

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"हमने अपने नसीब से ज्यादा

अपने दोस्तो पर भरोसा रखा है."

क्यूँ की नसीब तो बहुत बार

बदला है".

लेकिन मेरे दोस्त अभी भी वही है".

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उम्रकैद की तरह होते हैं कुछ रिश्ते,
जहाँ जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नहीं...

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दर्द को दर्द से न देखो,

दर्द को भी दर्द होता है,

दर्द को ज़रूरत है दोस्त की,

आखिर दोस्त ही दर्द में हमदर्द होता है...

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ज़ख़्म दे कर ना पूछा करो,

                          दर्द की शिद्दत...!

"दर्द तो दर्द" होता हैं,

              थोड़ा क्या, ज्यादा क्या...!!

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"दिन बीत जाते हैं सुहानी यादें बनकर,

बातें रह जाती हैं कहानी बनकर,

पर दोस्त तो हमेशा दिल के करीब रहेंगे,

कभी मुस्कान तो कभी आखों का पानी बन कर.

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वक़्त बहुत कुछ, छीन लेता है ...

खैर मेरी तो सिर्फ़ मुस्कुराहट थी ....!!

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क्या खूब लिखा है :

"कमा के इतनी दौलत भी मैं
अपनी "माँ" को दे ना पाया,.:::::

के जितने सिक्कों से "माँ"
मेरी नज़र उतारा करती थी..."

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गलती कबूल करने और

गुनाह छोड़ने में कभी देर ना करें......!

             क्योकिं

सफर जितना लम्बा होगा

वापसी उतनी मुश्किल हो जायेगी...!!

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इंसान बिकता है ...

कितना महँगा या सस्ता ये

उसकी मजबूरी तय करती है...!

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"शब्द दिल ❤ से निकलते है


दिमाग से तो मतलब निकलते है."..

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सब कुछ हासिल नहीं होता
ज़िन्दगी में यहाँ....

.

किसी का "काश" तो
किसी का "अगर" छूट ही जाता है...!!!!

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दो अक्षर की "मौत" और
तीन अक्षर के "जीवन" में ....

ढाई अक्षर का "दोस्त"
बाज़ी मार जाता हैं..

जिंदगी का तजूर्बा तो नहीं
पर इतना मालूम है ,

छोटा आदमी बडे मौके पर
काम आ जाता है।

और

बड़ा आदमी छोटी सी बात पर
 औकात दिखा जाता है !

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