Monday, February 23, 2015

ऋषिकुल कैसा हो ?
(१) १००० एकड़ भूमि पर विशाल जंगल हो नदि के तट पर
या पर्वत पर ।
(२) भवन प्राचीन शैली का हो जिसमें ईंट पत्थर का प्रयोग न
होकर घाँस लकड़ियों से बना हो । ऐसी ही यज्ञशालाएँ
हों जिससे कि कम खर्च में सब हो जाए ।
(३) जिसमें विद्युत ( बिजली ) का प्रयोग न्यून हो ।
(४) गौशाला विशाल हो जिससे कि देसी गाँय या बैल ही पाले
जाएँ ।
(५) कृषि भूमि पर्याप्त हो ताकि ब्रह्मचारियों के लिए शुद्ध
सात्विक और जैविक भोजन उत्पन्न हो सके ।
(६) शुद्ध जल पीने के लिए हो ।
(७) जिसमें वर्णोच्चारण शिक्षा से लेकर वेद पर्यन्त सभी विषय
पढ़ाए जा सकें ।
(८) जिसमें युद्ध की सभी विद्याएँ जैसे घुड़सवारी; धनुर्विद्या;
पिस्टल शूटिंग; भाला फेंकना; कलारिपट्ट्यम् ; गतका; मल्लयुद्ध
( कुश्ति ) ; कबड्डी आदि ब्रह्मचारीयों को सिखाया जाए ।
(९) इस ऋषिकुल में केवल ब्राह्मण और क्षत्रिय ही बनाए जाएँ ।
(१०) जैसे कालेजों में अलग अलग विभाग होते हैं । जैसे MBA;
BBA;MCA;MTech; BTech; Diploma आदि । ठीक वैसे
ही ऋषिकुल में व्याकरण; शिक्षा; निरुक्त; ब्राह्मणग्रंथ;
ज्योतिष; विमानशास्त्र; रसायनशास्त्र; वैदिकगणित आदि के अलग
अलग विभाग हों ।
(११) हर विभाग का एक निपुण मुखोध्यापक ( H.O.D. = Head
of department ) हो और प्रत्येक विभाग के कम से कम ५
उपाध्याय ( Teachers ) हों । ऐसा होने से मान लें कि लगभग
वेद और उसके विषयों के कुल २० विभाग हैं तो कुल उपाध्याय
हुए २० x ५ = १०० । लेकिन उपाध्याय निपुण होने चाहिएँ
अपने विषयों में ।
(१२) पढ़ने वाले ब्रह्मचारियों की संख्या एक विभाग में औसतन
२० हो । थोड़ा इससे कम या अधिक हो सकता है । ऐसा माने
से २० x २० = ४०० ब्रह्मचारी हुए । विद्या प्राप्ति के बाद
उनके गुणों के अनुसार ही ब्राह्मण या क्षत्रिय माना जाए ।
(१३) छात्रावास ( Hostel ) की व्यवस्था ठीक हो ।
(१४) अध्यापकों का वेतन ठीक होना चाहिए जिससे कि वे टिके
रहें ।
(१५) ४०० ब्रह्मचारीयों में से बहुत से ऐसे मिल जायेंगे
जो कि विद्या समाप्ति के बाद ऋषिकुल में ही सेवा देने का कार्य
करेंगे । जिससे कि भविष्य में शिक्षकों की कमी न होगी ।
(१६) ऋषिकुल में मेधावी छात्र ही लिए जाएँ । और आदिवासी ;
दलित; गरीब ; अनाथ वर्ग के बच्चों का चयन अधिक हो ।
जिससे कि समाज में जातीवाद कुछ समाप्त हो और वे बच्चे ईसाई
मुसलमान या वामपंथीयों के चंगुल से बचें ।
(१७) अध्ययन काल की समय सीमा करीब १५ से लेकर २० वर्ष
तक की हो । यानि कि १५ या २० वर्ष बाद
ब्रह्मचारियों का एक Batch निकलेगा ।
(१८) इतने बड़े ऋषिकुल में आवागमन के लिए अश्वशालाएँ ( घोड़े
का तबेला ) हों । ताकि घोड़ों पर आया जाया जा सके ।
(१९) विद्या प्राप्ति तक छात्र को घर न जाने दिया जाए ।
(२०) वैदिक शिक्षा के उपरांत । उन्हें कुछ आधूनिक शिक्षा जैसे
कम्प्यूटर आदि और कुछ विदेशी या प्रांतीय भाषाऐं
की शिक्षा दी जाए ।
(२१) वैदिक विज्ञान की पुनर्स्थापना के लिए ऋषिकुल में
प्रयोगशालाएँ खोली जाएँ । जिससे कि उत्तम बुद्धि युक्त
ब्राह्मण शोध कार्य कर सकें । और विज्ञान को सिद्ध कर सकें

(२२) विशाल भूमि पर आयुर्वेदिक जड़ी बूटियाँ हों ।
ओ३म

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