Monday, February 23, 2015

बिजली बिल में 50 फीसदी की कटौती. हर महीने 20 हजार लीटर मुफ्तपानी. फ्री वाई-फाई जोन. 15 लाख सीसीटीवी. और इसके अलावा आम आदमीपार्टी के तमाम तरह के लोकलुभावन वादे . दिल्ली दुल सेदुआ कर रही है कि केजरीवाल अपने वादों को पूरा करें लेकिन केजरीवाल करेंगे कैसे? केजरीवाल सरकार के पास इतने पैसे होंगे कि वो सभी वादे पूरा कर सके ?दिल्ली सरकार की आर्थिक सेहत पर गौरकीजिए .वित्तीय वर्ष 2014-15 में राजस्व वसूली का पहले लक्ष्य 36 हजार 404 करोड रुपये था लेकिन वसूली कम होती देखकर इसे संशोधित करके 33 हजार 894 करोड़ रुपया कर दिया गया .लेकिन अब टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर है कि वित्तीय वर्ष के अंत तक सरकार को संशोधित लक्ष्य से भी 3000 करोड़ रुपये कम मिल सकते हैं. अब देखिए अप्रैल 2014 से 31 जनवरी 2015 के बीच दिल्ली के खजाने में चोट कहां से पहुंची है ?स्टैंप और रजिस्ट्रेशन फीस से उम्मीद थी की 3500 करोड रुपये मिल जाएंगे लेकिन मिले केवल 2390 करोड़ रुपये . वैट से उम्मीदथी कि 21000 करोड़ रुपये मिलेंगे लेकिन मिले केवल 14 हजार 400 करोड़ . उत्पादकर से 3500 करोड़ का लक्ष्य था लेकिन वसूली हुई है 2700 करोड़ की . इसी तरह लक्जरी और मनोरंजन कर सेलक्ष्य था 560 करोड़ का लेकिन मिला है केवल 325 करोड़ .इसी तरह दूसरे विभागों से भी राजस्व वसूली में कमी आयी है जिसकी वजहसे दिल्ली सरकार को 3000 करोड़ की कम वसूली हो सकती है . मतलब सीएम पद संभालने से पहले ही अरविंद केजरीवाल को आर्थिक मोर्चे पर झटका. अब लौटते हैं केजरीवाल सरकार के वादे और उनके खर्च पर .15 लाख सीसीटीवी पर करीब 2 लाख 37 हजार करोड़ का खर्च.20 हजार लीटर मुफ्त पानी पर खर्च करीब 160 करोड़दिल्ली को फ्री वाई-वाई जोन में बदलने की कीमत करीब 1500 करोड़ रुपयेबिजली बिल में 50 फीसदी की कटौती पर सालाना 1500 करोड़ का बोझ.अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने पर सालाना खर्च करीब 2500 करोड़यानी केजरीवाल के केवल पांच वादों की कीमत है 2 लाख 43 हजार 670 करोड़ लेकिन इस साल राजस्व की प्राप्ति 33 हजार 894 करोड़ से भी कम .

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